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Dhar Bhojshala:धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

धार स्थित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप और पूजा-अधिकार से जुड़े मामले में सुनवाई पूरी हो गई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में मंगलवार को अंतिम बहस हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। यह सुनवाई पिछले कई दिनों से लगातार चल रही थी।
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धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

धार। 6 अप्रैल 2026 से लगातार चल रही सुनवाई अब पूरी हो गई है। सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क और साक्ष्य अदालत के सामने रखे। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट भी सुनवाई का अहम हिस्सा रही। फैसला सुरक्षित होने के बाद अब सभी को कोर्ट के निर्णय का इंतजार है।

इंदौर खंडपीठ में पूरी हुई सुनवाई

धार स्थित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप और पूजा-अधिकार से जुड़े बहुचर्चित मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई। कोर्ट ने सभी पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ में हुई। हाईकोर्ट में यह सुनवाई 6 अप्रैल 2026 से लगातार चल रही थी। सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अब फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

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2022 में दायर हुई थी याचिका 

भोजशाला मामले में वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री और अन्य साथियों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करते हुए हिंदू समाज को पूर्ण पूजा-अधिकार देने की मांग की गई थी। मुख्य याचिका के साथ चार अन्य याचिकाएं और एक अपील भी क्लब की गई थीं। इन सभी पर संयुक्त रूप से सुनवाई की गई। 

ASI ने 98 दिनों तक किया था सर्वे 

मामले में वर्ष 2024 में ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था। सर्वे रिपोर्ट और उससे जुड़े तथ्यों को भी सुनवाई के दौरान पक्षकारों ने अदालत के सामने रखा। इसके अलावा 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति देने का आदेश भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसी प्रकरण में दिया गया था। इन सभी पहलुओं को अदालत ने गंभीरता से सुना।

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दोनों पक्षों ने रखे तर्क, प्रमुख मांगों पर हुई बहस

6 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 तक हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने भोजशाला को मंदिर बताते हुए अपने तर्क रखे। इसके बाद मुस्लिम पक्ष और अन्य पक्षकारों ने इन दलीलों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए अपनी ओर से जवाब पेश किया। मंगलवार को हुई सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता ए.के. चितले, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन, अधिवक्ता सैयद अशहर अली वारसी और अधिवक्ता विश्वजीत जोशी सहित विभिन्न पक्षों के वकीलों ने जवाबी बहस पूरी की। याचिका में अनुच्छेद 25 के तहत पूजा-अधिकार, धार्मिक गतिविधियों पर रोक और ट्रस्ट गठन सहित कई मांगें रखी गई हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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