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जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत के दो गुटों ने अलगाववाद से तोड़ा नाता, अमित शाह बोले- यह मोदी सरकार की बड़ी जीत

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जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत के दो गुटों ने अलगाववाद से तोड़ा नाता, अमित शाह बोले- यह मोदी सरकार की बड़ी जीत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े दो गुटों जे एंड के पीपुल्स मूवमेंट और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट (DPM) ने अलगाववाद से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने की जीत करार दिया और कहा कि अलगाववाद अब इतिहास बन चुका है। शाह ने X पर पोस्ट कर इस फैसले का स्वागत किया और अन्य अलगाववादी समूहों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

गृह मंत्री ने फैसले का किया स्वागत

गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीतियों ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को खत्म कर दिया है। उन्होंने लिखा, "हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं और अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म कर दें।" शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित, शांतिपूर्ण और एकीकृत भारत के निर्माण के सपने की बड़ी जीत बताया।

मोदी सरकार की नीतियों से अलगाववाद खत्म- शाह

गृह मंत्री ने आगे लिखा, "मोदी सरकार की लोगों को एक साथ लाने वाली योजनाओं ने जम्मू-कश्मीर से अलगाववाद को खत्म कर दिया है। हुर्रियत से जुड़े दो संगठनों ने पूरी तरह से अलग होने की घोषणा की है। मैं इस कदम का स्वागत करता हूं। यह भारत को मजबूती देगा।" उन्होंने अन्य अलगाववादी संगठनों से भी आग्रह किया कि वे मुख्यधारा में लौटें और शांति व विकास की राह अपनाएं।

मोहम्मद शफी रेशी ने भी छोड़ा अलगाववाद

अलगाववाद से नाता तोड़ने वाले संगठनों के साथ-साथ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट (DPM) के अध्यक्ष रहे एडवोकेट मोहम्मद शफी रेशी ने भी हुर्रियत और DPM से अपने संबंध खत्म करने की घोषणा कर दी है। रेशी ने कहा, "मैं किसी भी राजनीतिक दल, विशेष रूप से किसी अलगाववादी संगठन से कोई संबंध नहीं रखता, जो कश्मीर की आजादी या भारत से अलग होने की वकालत करता है। मैं भारत की संप्रभुता और अखंडता में पूरी आस्था रखता हूं।" एडवोकेट मोहम्मद शफी रेशी, कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाली हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वे DPM के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। रेशी ने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा, "मैंने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस, DPM या किसी अन्य अलगाववादी संगठन से पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। मैं पहले ही DPM से इस्तीफा दे चुका हूं और पिछले सात वर्षों से अलगाववादी गतिविधियों से दूर हूं। हुर्रियत और अन्य अलगाववादी संगठनों की असलियत अब मुझे समझ आ चुकी है।"

क्या है हुर्रियत कॉन्फ्रेंस

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस 1993 में बना एक अलगाववादी संगठन था, जिसका दावा था कि वह कश्मीर की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है। यह कई छोटे-बड़े गुटों में बंटा हुआ था, जिनमें से कुछ भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। हाल के वर्षों में सरकारी सख्ती और जनता में बढ़ते समर्थन के चलते हुर्रियत का प्रभाव कम हो गया है। ये भी पढ़ें- पाकिस्तान दिवस पर राष्ट्रपति जरदारी की स्पीच वायरल, दिखे कन्फ्यूज, भाषण के दौरान लड़खड़ाई जुबान, पूर्व उच्चायुक्त ने कहा- यह हर पाकिस्तानी का मजाक
Wasif Khan
By Wasif Khan

फिलहाल जुलाई 2024 से पीपुल्स अपडेट में सब-एडिटर हूं। बीते 3 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हूं। 12वीं म...Read More

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