ईरान पर साथ नहीं आया साउथ कोरिया! कहा ‘नो थैंक्स’, ट्रंप ने घटाई सैन्य ट्रेनिंग, किम जोंग उन से अपनी दोस्ती का किया जिक्र

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को कम करने का निर्देश देकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अमेरिकी कोशिश में साथ देने को कहा था, लेकिन सियोल ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने पेंटागन को सैन्य अभ्यास का दायरा घटाने के लिए कहा। इस फैसले के साथ उन्होंने नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों का भी खुलकर जिक्र किया।
समर्थन नहीं मिलने से नाराज ट्रंप
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किए पोस्ट में कहा कि उन्होंने हाल ही में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या उनका देश ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के अमेरिकी अभियान में शामिल होना चाहेगा। ट्रंप के मुताबिक, साउथ कोरिया की ओर से जवाब मिला, “नहीं, धन्यवाद।” इसके बाद उन्होंने संयुक्त सैन्य अभ्यास को कम करने का फैसला बताया। ट्रंप ने यह भी कहा कि इन सैन्य अभ्यासों पर काफी पैसा खर्च होता है और इसका बड़ा हिस्सा अमेरिका उठाता है। उनके मुताबिक, ऐसे अभ्यास नॉर्थ कोरिया को ऐसा संदेश भी देते हैं, जिसे वह उचित नहीं मानते।
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किम जोंग से रिश्तों का दिया हवाला
ट्रंप ने अपने फैसले के पीछे नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने रिश्तों को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि किम के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध हैं और नॉर्थ कोरिया ने उनके राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका के प्रति शांत और सम्मानजनक रुख रखा है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब नॉर्थ कोरिया लगातार अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है। हाल ही में वहां बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण भी किए गए हैं।
सैन्य अभ्यास में शामिल होने थे हजारों सैनिक
अमेरिका और साउथ कोरिया का वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास नॉर्थ कोरिया से संभावित खतरे के खिलाफ दोनों देशों की तैयारी मजबूत करने के लिए किया जाता है। इस अभ्यास में करीब 18 हजार साउथ कोरियाई सैनिकों के शामिल होने की योजना थी। ट्रंप ने कहा कि अभ्यास को पूरी तरह रद्द करने में अब देर हो चुकी है, इसलिए इसके आकार और दायरे को कम किया जाएगा। साउथ कोरिया की ओर से कहा गया है कि अमेरिका के साथ तय सैन्य अभ्यास कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेंगे।
ट्रंप के फैसले पर उठे सवाल
ट्रंप के इस फैसले पर अमेरिका में भी सवाल उठ रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने संयुक्त सैन्य अभ्यास को कम करने के फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि ऐसे अभ्यासों को कमजोर करना सही कदम नहीं है और इससे अमेरिका की सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े हो सकते हैं। अमेरिका और साउथ कोरिया लंबे समय से सुरक्षा साझेदार हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग नॉर्थ कोरिया की गतिविधियों को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
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साउथ कोरिया के बाद ट्रंप का अगला संदेश
ट्रंप ने इसी दौरान सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ की भी तारीफ की। उन्होंने इसे क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया। ईरान के मुद्दे पर सहयोगियों से समर्थन मांगने और साउथ कोरिया के सैन्य अभ्यास को कम करने का ट्रंप का फैसला अमेरिकी विदेश नीति में बदलते रुख को दिखाता है।












