शाहपुरा तालाब पर NGT ने साफ कहा-एक दूसरे पर पल्ला झाड़ना बंद करो, 10 दिन में FTL-बफर जोन तय करो

भोपाल। शाहपुरा तालाब को बचाने के मामले में सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। एनजीटी ने अधिकारियों को साफ शब्दों में काम करने की समय-सीमा तय कर दी। सुनवाई के दौरान मध्य क्षेत्र पीठ ने विभागों के बीच समन्वय की कमी और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की आदत पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली से अदालत का समय बर्बाद होता है।
अवैध-अस्थायी निर्माणों पर होगी कार्रवाई
एनजीटी ने एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और नगर निगम को मिलकर 10 दिन में शाहपुरा तालाब का वास्तविक एफटीएल और बफर जोन निर्धारित करने का आदेश दिया। इसके बाद कैचमेंट और 50 मीटर बफर क्षेत्र में सामने आए अवैध व अस्थायी निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सुनवाई में एसडीएम कोलार के बिना पर्याप्त तैयारी के पहुंचने पर भी पीठ ने नाराजगी जताई। वहीं नगर निगम को अपना जवाब और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम चेतावनी दी गई। यानी अब शाहपुरा तालाब के मामले में सीमा तय करने से लेकर अतिक्रमण हटाने तक की जिम्मेदारी विभागों को समयबद्ध तरीके से निभानी होगी।
ड्रोन सर्वे में कैचमेंट के अंदर मिले निर्माण
24 जुलाई 2026 को कराए गए ड्रोन सर्वे ने शाहपुरा तालाब के कैचमेंट क्षेत्र की स्थिति को रिकॉर्ड पर ला दिया है। मप्र इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से हुए सर्वे में कई स्थायी और अस्थायी निर्माण तथा अतिक्रमण चिह्नित किए गए। अब एफटीएल और बफर जोन की सीमा स्पष्ट होने के बाद इन स्थानों की स्थिति के आधार पर कार्रवाई का रास्ता तय होगा। सर्वे रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण के सामने प्रस्तुत की गई है।
33 मीटर और 50 मीटर की सीमा का पेच
शाहपुरा तालाब के संरक्षण में एक अहम सवाल सीमा को लेकर भी है। मामले में भोपाल मास्टर प्लान में 33 मीटर और वेटलैंड्स नियम, 2017 के तहत 50 मीटर बफर क्षेत्र का उल्लेख सामने आया है। इसी कारण तालाब के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र की वास्तविक सीमा स्पष्ट करना जरूरी है। एनजीटी ने एफटीएल और बफर जोन का संयुक्त सीमांकन कराने का निर्देश इसी विवाद को स्पष्ट करने के लिए दिया है।
एफटीएल तय होते ही शुरू होगी अतिक्रमण कार्रवाई
अधिकरण ने सीमांकन पूरा होने के बाद कार्रवाई को आगे टालने की गुंजाइश नहीं छोड़ी है। एसडीएम कोलार को निर्देश दिया गया है कि एफटीएल और बफर जोन तय होने के बाद कैचमेंट तथा 50 मीटर बफर क्षेत्र में मौजूद अवैध और अस्थायी निर्माणों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू की जाए। इससे पहले संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना होगा कि कौन-सा निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है।
ये भी पढ़ें: केरवा में पानी बहता रहा, एफटीएल की सीमा नहीं मिल पाई, NGT ने 15 दिन में बहाव रोकने के उपाय करने को कहा
गंदा पानी रोकने की चुनौती भी बरकरार
शाहपुरा तालाब के संरक्षण का मामला केवल जमीन पर अतिक्रमण तक सीमित नहीं है। सुनवाई के दौरान तालाब में बिना उपचारित गंदे पानी के पहुंचने का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि अधिसूचित वेटलैंड होने के बावजूद जलप्रदूषण की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में तालाब की सीमा तय करने के साथ उसके जलग्रहण क्षेत्र और पानी की गुणवत्ता की सुरक्षा भी अहम चुनौती बनी हुई है।
अब आगे इन मुद्दों पर भी होगी नजर
- नगर निगम को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत जवाब और अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।
- एफटीएल तय होने के बाद प्रतिबंधित क्षेत्र में नए निर्माण की अनुमति पर भी निगरानी जरूरी होगी।
- एसडीएम कोलार को अगली कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
- जल संसाधन विभाग, नगर निगम और प्रशासन को संयुक्त सीमांकन में समन्वय करना होगा।
- कैचमेंट में मिले निर्माणों की प्रकृति और वैधता की जांच के बाद कार्रवाई तय होगी।
ये भी पढ़ें: भोपाल: छोटा तालाब प्रोजेक्ट पर NGT सख्त, 6.99 करोड़ के कायाकल्प कार्य की जांच के आदेश
उम्मीद है 10 दिन में सीमांकन पूरा होगा
इस बारे में याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना ने कहा कि “तालाब की सीमा और बफर क्षेत्र को लेकर लंबे समय से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही थी। एनजीटी ने अब विभागों की जिम्मेदारी तय कर दी है। उम्मीद है कि 10 दिन की समय-सीमा में सीमांकन पूरा होगा और शाहपुरा तालाब के संरक्षण को लेकर जमीन पर कार्रवाई दिखाई देगी।”




















