शहडोल के आदिवासी युवाओं को मिला हुनर का सहारा, नौकरी नहीं मिली तो काष्ठ शिल्प से बदली जिंदगी
शहडोल जिले के पचड़ी गांव के 29 वर्षीय सुंदर लाल बैगा ने 12वीं और डी.फार्मा (आयुष) की पढ़ाई की, लेकिन नौकरी नहीं मिली। काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण लिया तो जिंदगी को दूसरा रास्ता मिला और अब जॉब वर्क के जरिए करीब 15 हजार रुपये महीना कमा रहे हैं।
Rohit Sharma
5 Sep 2026


























