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PU Special :शहडोल के आदिवासी युवाओं को मिला हुनर का सहारा, नौकरी नहीं मिली तो काष्ठ शिल्प से बदली जिंदगी

शहडोल जिले के पचड़ी गांव के 29 वर्षीय सुंदर लाल बैगा ने 12वीं और डी.फार्मा (आयुष) की पढ़ाई की, लेकिन नौकरी नहीं मिली। काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण लिया तो जिंदगी को दूसरा रास्ता मिला और अब जॉब वर्क के जरिए करीब 15 हजार रुपये महीना कमा रहे हैं।
शहडोल के आदिवासी युवाओं को मिला हुनर का सहारा, नौकरी नहीं मिली तो काष्ठ शिल्प से बदली जिंदगी
शहडोल के आदिवासी युवाओं को मिला हुनर का सहारा

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के करीब 100 युवाओं को काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान छात्रवृत्ति के साथ लकड़ी और जरूरी उपकरण भी उपलब्ध कराए गए। 100 दिन के प्रशिक्षण के बाद युवाओं को जॉब वर्क से जोड़कर उनके हुनर को कमाई में बदलने का रास्ता तैयार किया गया।

नौकरी नहीं मिली तो काष्ठ शिल्प से बदली जिंदगी

सुंदर लाल बैगा बताते हैं कि पहले महीने में तीन-चार हजार रुपये की मजदूरी ही हो पाती थी। काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण तरु शिल्प नाम से लिया तो जैसे जिंदगी का दूसरा रास्ता मिल गया। अब जॉब वर्क के जरिए करीब 15 हजार रुपये महीना कमा रहे हैं।

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हुनर को गांव से निकालकर मोबाइल की स्क्रीन तक

तरु शिल्प नाम से छह महीने में 100 से ज्यादा उत्पाद तैयार किए जा चुके हैं और इनसे 1.5 लाख रुपये से अधिक की आय हुई है। लकड़ी के हस्तशिल्प के अलावा दरी, कालीन और गोंडी चित्रकला के उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। अब आदिवासी कारीगरों का हुनर स्थानीय सीमाओं से निकलकर देश के बाजार तक पहुंच रहा है।

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हुनर के बाद भी बाजार नहीं मिला

शहडोल के जनजातीय समुदायों में हस्तशिल्प की परंपरा पुरानी है, लेकिन आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षण और बाजार की कमी के कारण यह हुनर धीरे-धीरे रोजगार का आधार नहीं बन पा रहा था। तरु शिल्प ने इसी कड़ी को जोड़ने की कोशिश की है। परंपरा को प्रशिक्षण मिला, प्रशिक्षण को उत्पादन और उत्पादन को अब डिजिटल बाजार।

सिलाई-कढ़ाई से काष्ठ शिल्प और गोंडी पेंटिंग तक

छतवई की दुर्गा सिंह बताती हैं कि पढ़ाई छूटने के बाद घर पर सिलाई-कढ़ाई करती थीं। खर्च तो निकल जाता था, लेकिन मन में आगे बढ़ने की चाह बनी रही। हस्तशिल्प केंद्र में प्रशिक्षण का मौका मिला तो काष्ठ शिल्प और गोंडी पेंटिंग सीख ली, अब वे जॉब वर्क कर रही हैं और आगे खुद मास्टर ट्रेनर बनकर गांव के दूसरे लोगों को यह हुनर सिखाना चाहती हैं।

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शहडोल की हस्तशिल्प को अब मिलने लगा बाजार

जिला कलेक्टर पार्थ जैसवाल की पहल पर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के करीब 100 युवाओं को काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण दिया गया। ऊटऋ की राशि से 100 युवाओं को काष्ठ शिल्प का प्रशिक्षण, लकड़ी और उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। अब उनके उत्पाद अमेजान के माध्यम से देशभर में पहुंच सकेंगे।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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