PU Special :दिन की सौर बिजली बैटरी में होगी स्टोर, रात में राजगढ़-ब्यावरा से मिलेगी 125 मेगावाट बिजली

संतोष चौधरी, भोपाल। मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने और बिजली की मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राजगढ़-ब्यावरा में बड़ी बैटरी एनर्जी स्टोरेज परियोजना स्थापित की जाएगी। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) ने 125 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना की दर को मंजूरी दे दी है। जीएच2 सोलर लिमिटेड की इस परियोजना में 250 मेगावाट-घंटे बिजली संग्रहित की जा सकेगी। इसका उद्देश्य दिन में उपलब्ध अतिरिक्त सौर ऊर्जा को बैटरी में स्टोर करना और शाम या रात में मांग बढ़ने पर ग्रिड को बिजली उपलब्ध कराना है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दिन के समय सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होने पर अतिरिक्त बिजली बैटरी में जमा की जाएगी। इसके बाद जरूरत के समय इसका इस्तेमाल बिजली आपूर्ति के लिए किया जा सकेगा। बैटरी पूरी क्षमता से काम करने पर कम से कम दो घंटे तक 125 मेगावाट बिजली दे सकेगी। इससे बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एमपीईआरसी ने दर को दी मंजूरी
एमपीईआरसी ने परियोजना से जुड़ी निविदा की शर्तों, प्रतिस्पर्धा, कंपनियों की भागीदारी और वित्तीय प्रस्तावों की जांच के बाद दर को मंजूरी दी है। आयोग ने पाया कि बोली प्रक्रिया केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप थी। संबंधित कंपनी और बिजली वितरण कंपनियों की ओर से भी इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं आई।
3125 मेगावाट क्षमता के प्रस्ताव, 125 मेगावाट की परियोजना मंजूर
बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं के लिए हुई निविदा प्रक्रिया में कुल 3125 मेगावाट क्षमता के प्रस्ताव मिले थे। इसमें 11 कंपनियों ने हिस्सा लिया। कुल 750 मेगावाट क्षमता की चार परियोजनाओं के लिए निविदा जारी की गई थी। अंतिम नीलामी में आठ कंपनियों ने भाग लिया, जबकि 10 कंपनियां वित्तीय बोली के लिए योग्य पाई गईं। अब 625 मेगावाट क्षमता की शेष परियोजनाओं के लिए दोबारा बोली प्रक्रिया होगी।
दो साल बाद पहला बैटरी स्टोरेज क्रय आदेश
एमपी जेनको के रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी को नौ महीने के भीतर 1500 मेगावाट-घंटे बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता खरीदने के आदेश जारी करने थे। इसका उद्देश्य केंद्र की योजना के तहत 18 लाख रुपए प्रति मेगावाट की सब्सिडी का लाभ लेना था। अग्रवाल के मुताबिक करीब दो साल बाद पहला बैटरी स्टोरेज क्रय आदेश जारी हुआ है, लेकिन इसकी क्षमता महज 125 मेगावाट है। यह तय लक्ष्य के मुकाबले काफी कम है। इससे बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और केंद्र की सब्सिडी का लाभ मिलने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शेष 625 मेगावाट क्षमता के लिए फिर होगी बोली
मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी के एमडी विशेष गढ़पाले के मुताबिक, 750 मेगावाट के लक्ष्य के मुकाबले 125 मेगावाट बैटरी स्टोरेज का टेंडर मंजूर हुआ है। शेष क्षमता के लिए री-टेंडर जारी किए गए हैं।




















