PU Special :सिंहस्थ से पहले MP के प्रमुख मंदिरों में बदलेगा मैनेजमेंट सिस्टम, दान-दर्शन से सुरक्षा तक होंगे सुधार

मध्यप्रदेश सरकार सिंहस्थ से पहले महाकाल, ओंकारेश्वर, ओरछा और मैहर सहित प्रमुख मंदिरों में नया मैनेजमेंट मॉडल लागू करने की तैयारी कर रही है। तिरुपति, अयोध्या और सोमनाथ की व्यवस्थाओं के अध्ययन के बाद कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है।
सिंहस्थ से पहले MP के प्रमुख मंदिरों में बदलेगा मैनेजमेंट सिस्टम, दान-दर्शन से सुरक्षा तक होंगे सुधार
MP के प्रमुख मंदिरों में बदलेगा मैनेजमेंट सिस्टम

राजीव सोनी, भोपाल। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ से पहले मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की तैयारी है। महाकाल, ओंकारेश्वर, ओरछा और मैहर सहित प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में तिरुपति, अयोध्या और सोमनाथ की तर्ज पर नया मैनेजमेंट मॉडल लागू किया जा सकता है। इसके तहत दान और दर्शन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और प्रसादम की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अधिकारियों की टीम देश के प्रमुख मंदिरों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चुकी है। टीम ने दान, दर्शन, सुरक्षा, क्राउड कंट्रोल, प्रसादम और श्रद्धालुओं को मिलने वाली अन्य सुविधाओं की जानकारी जुटाई है। अब सरकार को हाई लेवल कमेटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर मंदिरों की व्यवस्थाओं में बदलाव का खाका तैयार किया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था, दान प्रणाली और बुनियादी सुविधाओं में बड़े बदलाव किए जाने हैं। खासतौर पर दर्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने पर जोर रहेगा। तिरुपति की तर्ज पर होल्डिंग एरिया और स्लॉट बुकिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने की तैयारी है, ताकि त्योहारों और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारों को कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री कर चुके हैं प्रमुख मंदिरों का भ्रमण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अप्रैल-मई के दौरान दक्षिण भारत के कुछ मंदिरों का भ्रमण किया था। इस दौरान उन्होंने तिरुपति, मदुरै और अयोध्या की तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए थे। इनमें महाकाल सहित प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने दान-दर्शन, प्रसादम, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए बेहतर मैनेजमेंट मॉडल तैयार करने पर जोर दिया था। इसके बाद अधिकारियों की टीम को देश के प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई। टीम अपना दौरा पूरा कर चुकी है। अब अध्ययन और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नई व्यवस्था का प्रारूप तैयार किया जाएगा।

सिंहस्थ से पहले प्रमुख मंदिरों में पहले चरण में बदलाव

उज्जैन में करीब डेढ़ साल बाद होने वाले सिंहस्थ में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए सरकार सिंहस्थ से पहले ही प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करना चाहती है। पहले चरण में उन मंदिरों को शामिल किया जाएगा, जहां सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें प्रमुख ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर और ओंकारेश्वर मंदिर, ओरछा का रामराजा मंदिर, मैहर का शारदा देवी मंदिर, इंदौर का खजराना गणेश मंदिर और सलकनपुर देवी धाम शामिल हैं। पहले चरण के बाद प्रदेश के अन्य मंदिरों के मैनेजमेंट सिस्टम में भी बदलाव किया जाएगा।

दर्शन से लेकर दान तक, इन पांच व्यवस्थाओं पर रहेगा फोकस

1. दर्शन व्यवस्था और क्राउड कंट्रोल: त्योहारों और विशेष अवसरों पर सुगम दर्शन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। तिरुपति की तर्ज पर होल्डिंग एरिया और स्लॉट बुकिंग जैसे विकल्पों पर काम होगा, ताकि भीड़ का बेहतर प्रबंधन किया जा सके और लंबी कतारों से राहत मिले।

2. पारदर्शी दान और डिजिटल ऑडिट: मंदिरों में मिलने वाले करोड़ों रुपए के चढ़ावे, सोने-चांदी, गुप्त दान और ऑनलाइन डोनेशन की निगरानी के लिए पारदर्शी डिजिटल सिस्टम विकसित करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य दान की प्रक्रिया और उसके लेखा-जोखा को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

3. बुनियादी सुविधाएं: श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बेहतर इंतजाम, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण प्रसादम और स्वच्छता के कड़े मानक लागू करने पर जोर रहेगा।

4. सुरक्षा व्यवस्था: मंदिर परिसरों में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड और बड़े प्रवेश एवं निकास द्वार विकसित करने की योजना है। इससे भीड़ के दौरान सुरक्षा और आवाजाही को बेहतर बनाया जा सकेगा।

5. श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रबंधन: दर्शन से लेकर परिसर में उपलब्ध सुविधाओं तक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने पर ध्यान दिया जाएगा ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

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परंपराओं और मंदिरों की मर्यादा भी रहेगी सुरक्षित

धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के मुताबिक, सरकार को अधिकारियों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर ड्राफ्ट तैयार कर उसे मंजूरी दी जाएगी। प्रमुख मंदिरों में चरणबद्ध तरीके से नया मैनेजमेंट मॉडल लागू किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर फोकस रहेगा। साथ ही मंदिरों की मर्यादा और परंपराओं को भी सुरक्षित रखा जाएगा।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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