PU Special :CBI के शिकंजे में महादेव ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर! रायपुर पहुंचते ही बढ़ी हलचल, 6 हजार करोड़ के सट्टा घोटाले में कल स्पेशल कोर्ट में पेशी

प्रेम कुमार, रायपुर: देश के चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब 6 हजार करोड़ रुपये के कथित सट्टा कारोबार के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को CBI की टीम दिल्ली से लेकर रायपुर पहुंच गई है। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाए गए सौरभ को अब 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाना है। एयरपोर्ट पर मीडिया की मौजूदगी के चलते CBI टीम आरोपी को दूसरे गेट से बाहर लेकर रवाना हुई। इस गिरफ्तारी के बाद महादेव सट्टा नेटवर्क के राजनीतिक कनेक्शन, हवाला कारोबार और कथित प्रोटेक्शन मनी को लेकर बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली से रायपुर पहुंचते ही बढ़ी हलचल, दूसरे गेट से निकाला गया आरोपी
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में CBI की कार्रवाई अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को दिल्ली से फ्लाइट E6 2307 के जरिए रायपुर लाया गया। एयरपोर्ट पर मीडिया की मौजूदगी को देखते हुए CBI टीम ने निर्धारित निकास द्वार के बजाय दूसरे गेट का इस्तेमाल किया। इसके बाद आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। CBI अब उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहले ही दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर चुकी है।
4 नवंबर तक रायपुर कोर्ट में पेशी का आदेश
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने सौरभ चंद्राकर को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर CBI को सौंपने का आदेश दिया था। अदालत ने निर्देश दिया है कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाए। अब प्रत्यर्पण की शर्तों, CBI की कार्रवाई और आगे की पूछताछ से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर रायपुर की अदालत में सुनवाई हो सकती है।
6 हजार करोड़ का कथित सट्टा घोटाला, जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क
महादेव ऑनलाइन बुक ऐप को लेकर जांच एजेंसियों का आरोप है कि सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर देशव्यापी ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क खड़ा किया था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जाता था। इसके लिए अलग-अलग पैनल और ब्रांच बनाए गए थे। फ्रेंचाइजी मॉडल की तर्ज पर लोगों को जोड़ा जाता था और उनके माध्यम से सट्टे का कारोबार चलाया जाता था।जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में देश के अलग-अलग राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ के युवाओं को भी कर्मचारी और मैनेजर के रूप में शामिल किया गया था।
CM विष्णुदेव साय का बड़ा बयान, प्रोटेक्शन मनी पर होगा खुलासा
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI को बधाई दी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा होगा। इस बयान के बाद महादेव ऐप मामले में कथित राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।
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प्रत्यर्पण पर आरोपी के वकील ने उठाए सवाल
दिल्ली की अदालत में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने ओमान की अदालत के आदेश का हवाला देते हुए CBI की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। बचाव पक्ष की दलील थी कि भारत की ओर से ओमान को भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में ED के मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि CBI के मामले को मंजूरी नहीं दी गई थी।वकील ने कहा कि प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार आरोपी पर उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है। इसलिए CBI द्वारा अपने मामले में रिमांड लेने की कार्रवाई पर कानूनी सवाल उठते हैं।
CBI का जवाब: प्रत्यर्पण और मुकदमे पर फैसला रायपुर कोर्ट करेगी
CBI ने अदालत में बताया कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत पहले ही ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है। जांच एजेंसी का कहना था कि ED और CBI के मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिलहाल दिल्ली की अदालत से केवल रायपुर तक आरोपी को लाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मांगी गई है। CBI के अनुसार, प्रत्यर्पण की शर्तों और मुकदमा चलाने के अधिकार से जुड़े कानूनी सवालों पर रायपुर की विशेष अदालत फैसला करेगी।
2022 की FIR से जुड़ा है महादेव ऐप का मामला
- CBI की जांच के मुताबिक, महादेव बुक ऐप को सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर प्रमोट किया था। आरोप है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए कई प्लेटफॉर्म और पैनल तैयार किए गए थे।
- इनके जरिए सट्टा लगाने वालों से रकम एकत्रित की जाती थी। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से पैसों का लेन-देन किया जाता था।
- जांच एजेंसी का आरोप है कि सट्टे से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर UAE तक पहुंचाया जाता था। इस नेटवर्क का संचालन दुबई से किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
- छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से जुड़ी 13 FIR की जांच CBI को सौंपी थी। इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
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116 दिन की हिरासत के बाद ओमान से भारत लाया गया सौरभ
CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था। वह वर्ष 2023 से दुबई में रह रहा था। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। जांच एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया। 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने खुफिया जानकारी और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद भारत सरकार, CBI, ED, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और 1 नवंबर को उसे भारत लेकर आई।
फर्जी पासपोर्ट में बदली पहचान, नाम लिखा था 'अजंता मेंडिस'
इस मामले में सौरभ की कथित फर्जी पहचान को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसके कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट में फोटो सौरभ चंद्राकर की थी, लेकिन नाम 'अजंता मेंडिस' दर्ज था। यह नाम श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजंता मेंडिस के नाम से मिलता-जुलता था। पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि भी दूसरे दस्तावेजों से अलग बताई गई थी। हालांकि, इन दस्तावेजों से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी है।
ओमान में सौरभ ने जताया था जान का खतरा
भारत प्रत्यर्पित किए जाने से पहले सौरभ चंद्राकर ने ओमान में हिरासत के दौरान भारत की जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। उसने दावा किया था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसने अपने परिवार की सुरक्षा और पूछताछ के दौरान बिना किसी दबाव के बयान देने का अवसर मांगा था। सौरभ ने जांच एजेंसियों को नेटवर्क से जुड़े राजनीतिक संपर्क, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों की जानकारी देने की बात भी कही थी। ये उसके द्वारा किए गए दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।
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हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी सट्टे की रकम
CBI की जांच में आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद कई स्तरों पर लेन-देन कर रकम को छिपाया जाता था और हवाला के जरिए विदेश भेजा जाता था। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि नेटवर्क को बिना रुकावट संचालित करने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी।CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। दूसरी ओर ED मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर भारत और विदेश में कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।
अब आगे क्या होगा? रायपुर कोर्ट में खुलेगा कानूनी कार्रवाई का अगला रास्ता
सौरभ चंद्राकर की रायपुर में पेशी के बाद महादेव ऐप मामले में आगे की जांच और पूछताछ की दिशा तय होगी।CBI की पेशी: आरोपी को 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाना है।कानूनी सवाल: प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत CBI के मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति का प्रश्न अदालत के सामने आ सकता है। पूछताछ: अदालत के आदेश के अनुसार CBI आगे की पूछताछ के लिए रिमांड मांग सकती है। ED की जांच: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED भी अपनी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। बड़े खुलासों की उम्मीद: कथित हवाला नेटवर्क, प्रोटेक्शन मनी और विदेशों में संपत्तियों से जुड़े सवाल अहम रहेंगे। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि महादेव ऐप के इस कथित हजारों करोड़ के नेटवर्क में पैसा किन-किन रास्तों से पहुंचा और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे? रायपुर की विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।




















