PU Special :एमपी में गरीबों को सस्ते मकान देने की तैयारी, निजी बिल्डरों की जमीन और निवेश से बनेंगे घर; 1.5 लाख मकानों का लक्ष्य

अशोक गौतम, भोपाल। प्रस्तावित नीति में सरकारी जमीन के साथ निजी बिल्डरों की जमीन और निवेश का इस्तेमाल कर सस्ते मकान बनाए जाएंगे। मकानों की कीमत घटाने के लिए निर्माण, एफएआर, स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क में रियायतें देने का प्रस्ताव है। सरकार ने छह से नौ महीने में करीब 1.5 लाख मकानों की मंजूरी और निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
निजी बिल्डरों की जमीन और निवेश से बनेंगे किफायती मकान
प्रस्तावित किफायती आवास नीति-2026 में मकान बनाने के लिए चार मॉडल रखे गए हैं। इनमें सरकारी एजेंसियां अपनी जमीन पर मकान बनाएंगी, सरकारी जमीन पर पीपीपी से निजी बिल्डर निर्माण करेंगे, निजी बिल्डर अपनी जमीन पर मिश्रित आवासीय परियोजनाएं विकसित करेंगे और सरकारी जमीन पर विकास अधिकार देकर निजी क्षेत्र से मकान बनवाए जाएंगे। परियोजना के अनुमत निर्माण क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के लिए रखना होगा। अन्य आय वर्ग के मकानों और व्यावसायिक हिस्सों से होने वाली कमाई के जरिए सस्ते मकानों की लागत घटाने की व्यवस्था भी होगी।
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जमीन और निर्माण में रियायत
बिल्डरों को प्रोत्साहित करने के लिए एफएआर बढ़ाने का प्रस्ताव है। शहरों की श्रेणी के अनुसार आधार एफएआर 2, 2.5 और 3 तक रखा जा सकता है, जबकि किफायती आवास परियोजनाओं में अधिकतम 3 एफएआर का लाभ मिलेगा। सरकारी जमीन पर ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के लिए स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट प्रस्तावित है। निजी जमीन पर ईडब्ल्यूएस को पूरी और एलआईजी को 50 प्रतिशत छूट मिल सकती है। कॉलोनी विकास, भवन अनुमति, लेआउट और अन्य शुल्कों में भी रियायतें देने की योजना है।
किराये का मकान बनेगा आगे चलकर अपना घर
नीति में औद्योगिक क्षेत्रों की आवासीय जमीन का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा किफायती आवास के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। बिल्डर मुख्य परियोजना से दो किलोमीटर के दायरे में इन मकानों का निर्माण कर सकेंगे। श्रमिकों को पहले लंबे समय के किराये पर मकान और बाद में मालिकाना हक देने वाला रेंट टू ओन मॉडल अपनाया जाएगा। इसके अलावा अस्पतालों, कॉलेजों और आईटी पार्कों के आसपास कर्मचारियों, विद्यार्थियों और प्रवासी पेशेवरों के लिए किराये के मकान बनाए जाएंगे।
एक पोर्टल पर मकान की कीमत से लेकर मंजूरी तक की जानकारी
आवास योजनाओं में पारदर्शिता के लिए भूमि पोर्टल विकसित करने का प्रस्ताव है। इस पर उपलब्ध मकानों की संख्या, कीमत, बिल्डर, रेरा पंजीयन और मंजूरियों से जुड़ी जानकारी मिलेगी। मकान निर्माण की अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था भी शुरू की जाएगी। नई नीति के प्रारूप में छह से नौ महीने के भीतर करीब डेढ़ लाख मकानों की स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू करने की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है।
झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए बनेगी अलग अथॉरिटी
झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए अलग स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी बनाई जाएगी। जहां संभव होगा, वहां लोगों को उसी स्थान पर नए मकान दिए जाएंगे। सरकार इस अथॉरिटी के लिए जमीन उपलब्ध कराएगी और पीपीपी अथवा विभिन्न योजनाओं के तहत आवास तैयार किए जाएंगे। सरकार की कार्ययोजना के अनुसार पहले छह महीने में पोर्टल और मंजूरी व्यवस्था शुरू होगी। अगले तीन महीने में भूमि विकास, नगर तथा ग्राम निवेश और स्टाम्प शुल्क से जुड़े नियमों में संशोधन कर करीब 1.5 लाख मकानों की मंजूरी और निर्माण शुरू करने का लक्ष्य है। हालांकि, ये सभी प्रावधान फिलहाल प्रस्तावित हैं। इनका लाभ अंतिम नीति, नियमों में संशोधन और जमीन तथा बजट की उपलब्धता के बाद ही मिल सकेगा।




















