यहां शव को देना पड़ता है किराया :टाइम पर नहीं लौटाया पैसा तो बाहर फेंक दिया जाता है मुर्दा
यहां माहौल सन्नाटे वाला नहीं, बल्कि जीवंत होता है। लोग समय-समय पर अपने अपनों की इन ‘छोटी कोठरियों’ को साफ करने, सजाने और उन्हें याद करने आते हैं। यह परंपरा एक तरह से यादों को जिंदा रखने का तरीका बन गई है।
Aakash Waghmare
14 Apr 2026


























