PU Special :जासूस की मदद से सामने आई आय, पहली पत्नी को 16 लाख रुपए गुजारा भत्ता देगा पति; कोर्ट ने छह महीने में चुकाने के दिए आदेश

पल्लवी वाघेला, भोपाल। अदालत ने यह राशि छह माह और अधिकतम आठ महीने के भीतर चार किस्तों में चुकाने के निर्देश दिए हैं। पति टाटा मोटर्स में कार्यरत है और सुनवाई के दौरान उसकी मासिक आय करीब 52 हजार रुपए सामने आई। अदालत ने पत्नी की उम्र, आर्थिक स्थिति और आजीविका के दूसरे साधनों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।
दूसरी शादी के बाद खत्म हो गई साथ रहने की गुंजाइश
मामले में पति टाटा मोटर्स में कार्यरत है। दोनों की शादी साल 2006 में हुई थी, लेकिन उनके बीच विवाद रहने लगा। पति ने तलाक का केस लगाया तो पत्नी ने इस आधार पर आपसी सहमति दी कि पति एकमुश्त मेंटेनेंस देगा। पत्नी के मुताबिक, पति के जीवन में दूसरी महिला थी और वह खुद इस रिश्ते में नहीं रहना चाहती थी।
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तलाक के अगले ही दिन कर ली दूसरी शादी
तलाक की डिक्री हुई, लेकिन पति ने कोविड और कम आय का हवाला देकर केवल चार हजार रुपए प्रतिमाह मेंटेनेंस देने पर हामी भरी। यही नहीं, तलाक की डिक्री मिलने के अगले ही दिन उसने शादी कर ली। ऐसे में पहली पत्नी की ओर से स्थायी गुजारा भत्ते की मांग पर जोर दिया गया, क्योंकि उसके पास जीवनयापन का कोई दूसरा साधन नहीं था और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए उचित राशि मिलना जरूरी था।
जासूस की मदद से सामने आई 52 हजार रुपए मासिक आय
सुनवाई के दौरान पहली पत्नी ने जासूस की मदद से पति की वास्तविक आय का पता लगाकर सबूत पेश किए। इसमें पति की मासिक आय करीब 52 हजार रुपए होने और अन्य संपत्ति की जानकारी सामने आई। अदालत ने पत्नी की उम्र, आर्थिक स्थिति और आजीविका के दूसरे साधनों की उपलब्धता पर भी गौर किया।
43 वर्षीय महिला के पास भरण-पोषण का दूसरा साधन नहीं
महिला की उम्र 43 वर्ष थी और उसके पास खुद के भरण-पोषण का कोई अन्य साधन नहीं था। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने पति को एकमुश्त गुजारा भत्ता चुकाने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि छह माह और अधिकतम आठ महीने के भीतर चार किस्तों में 16 लाख रुपए की राशि पत्नी को दी जाए।
समय पर राशि नहीं देने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
कोर्ट ने कहा कि तय समय पर पत्नी को राशि दी जाए, अन्यथा पहली पत्नी कानूनी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगी। एडवोकेट दीपिका सिंह के मुताबिक, गुजारा भत्ता तय करते समय पति की वास्तविक आय, संपत्ति, जीवन स्तर और पत्नी की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है। अगर कोई पक्ष अपनी आय या आर्थिक स्थिति के बारे में गलत जानकारी देता है, तो संबंधित दस्तावेजों और वैधानिक माध्यमों से उसकी जांच कराई जा सकती है। गुजारा भत्ते का उद्देश्य केवल तत्काल खर्च चलाना नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा देना भी है। इसलिए ऐसे मामलों में आय से जुड़े दस्तावेज और महिला की वास्तविक आर्थिक स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




















