PU Special :मध्यप्रदेश में EV को रफ्तार देने की तैयारी, 5 शहर बनेंगे मॉडल ईवी सिटी; रैंकिंग में 23वें से सातवें स्थान पर पहुंचा प्रदेश

मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल ईवी सिटी बनाने की तैयारी है। नीति आयोग के इंडेक्स में प्रदेश 23वें से सातवें स्थान पर पहुंचा, लेकिन चार्जिंग नेटवर्क की चुनौतियां बरकरार हैं।
मध्यप्रदेश में EV को रफ्तार देने की तैयारी, 5 शहर बनेंगे मॉडल ईवी सिटी; रैंकिंग में 23वें से सातवें स्थान पर पहुंचा प्रदेश
मध्यप्रदेश में EV को रफ्तार देने की तैयारी

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नई नीति, ऑनलाइन पोर्टल और पांच प्रमुख शहरों को मॉडल ईवी सिटी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। नीति आयोग के इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) 2025 में प्रदेश की स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2024 में 23वें स्थान पर रहा मध्यप्रदेश 2025 में सातवें स्थान पर पहुंच गया। हालांकि, रैंकिंग में सुधार के बावजूद प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार की योजना इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने, चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार करने, सार्वजनिक और निजी परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने तथा इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने पर केंद्रित है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में मॉडल ईवी सिटी विकसित करने की तैयारी है। इन शहरों में परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के साथ पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जाएगा।

नीति आयोग के इंडेक्स में 23वें से सातवें स्थान पर पहुंचा मध्यप्रदेश

नीति आयोग के इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स में मध्यप्रदेश की रैंकिंग में एक साल के भीतर उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2024 में प्रदेश 23वें स्थान पर था, जबकि 2025 में सातवां स्थान हासिल किया। इस इंडेक्स के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का आकलन किया जाता है। इंडेक्स में परिवहन के विद्युतीकरण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी तथा अनुसंधान एवं नवाचार जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया जाता है। नवीनतम इंडेक्स में दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, चंडीगढ़ और गोवा शीर्ष पांच स्थानों पर हैं। प्रदेश की रैंकिंग में सुधार के बीच चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता और विस्तार पर सवाल भी बने हुए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश में 1,300 से अधिक चार्जिंग स्टेशन हैं, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में प्रदेश की 14वीं रैंक बताई गई है। इस आंकड़े और रैंकिंग की संबंधित आधिकारिक स्रोत से पुष्टि जरूरी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि समग्र रैंकिंग में सुधार के साथ चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार भी अहम है।

भोपाल, इंदौर समेत पांच शहर बनेंगे मॉडल ईवी सिटी

मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल ईवी सिटी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इन शहरों में सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने, ग्रीन जोन विकसित करने और ई-मोबिलिटी के लिए विशेष कॉरिडोर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य शहरी परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाना है। यदि योजना के तहत जरूरी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो इलेक्ट्रिक बसों, निजी ईवी और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि मॉडल ईवी सिटी विकसित करने के लिए केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए शहरों में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन, इलेक्ट्रिक बसों और अन्य वाहनों के लिए उपयुक्त चार्जिंग सुविधाएं, समय पर बिजली कनेक्शन और चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराना जरूरी होगा।

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 में क्या है खास?

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है। नीति में चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क विकसित करने, सार्वजनिक एवं निजी परिवहन के विद्युतीकरण और ईवी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया गया है। इस नीति के तहत नगरीय विकास एवं आवास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। विभाग की जिम्मेदारी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन और संबंधित व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय तथा उपभोक्ताओं को उपलब्ध प्रोत्साहनों की जानकारी देना जरूरी होगा। इसके साथ ही ईवी खरीदने और इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी ध्यान देना होगा।

चार्जिंग स्टेशन और बिजली की उपलब्धता बड़ी चुनौती

प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है। शहरों के साथ-साथ हाईवे और लंबी दूरी के मार्गों पर भी पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होने चाहिए। इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशनों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना भी जरूरी है। चार्जिंग स्टेशन की कमी के कारण कई ईवी उपयोगकर्ता लंबी दूरी की यात्रा करने से बचते हैं। यदि रास्ते में चार्जिंग सुविधा नहीं मिलती या स्टेशन पर बिजली उपलब्ध नहीं होती, तो यात्रा के दौरान परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में कई लोग लंबी दूरी के सफर के लिए पेट्रोल-डीजल वाले वाहनों को प्राथमिकता देते हैं।

भोपाल के कोलार निवासी रवि प्रकाश जादौन का कहना है कि हाईवे पर चार्जिंग स्टेशनों की कमी है। इस कारण ईवी को दूरदराज के इलाकों तक ले जाने से लोग परहेज करते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार चार्जिंग स्टेशन पर बिजली भी उपलब्ध नहीं रहती। ऐसी परिस्थितियों में लंबी दूरी की यात्रा के लिए पेट्रोल-डीजल वाले वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ता है।

यह स्थिति बताती है कि ईवी को अपनाने के लिए केवल वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन देना पर्याप्त नहीं है। उपयोगकर्ताओं को भरोसेमंद चार्जिंग नेटवर्क और लंबी दूरी के सफर के दौरान सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

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नई इमारतों में चार्जिंग सुविधा और जमीन की उपलब्धता पर जोर

ईवी चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए उपयुक्त स्थान और जमीन उपलब्ध कराना अहम होगा। इसके लिए रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराने जैसे उपायों पर भी ध्यान देने की जरूरत है, ताकि निवेशकों को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में आसानी हो। नई इमारतों में चार्जिंग सुविधाओं की व्यवस्था और पुराने भवनों में चार्जिंग पॉइंट लगाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाना भी जरूरी है। इसके साथ बिजली कनेक्शन की समयबद्ध मंजूरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। मॉडल ईवी सिटी योजना के तहत सार्वजनिक परिवहन, निजी वाहनों और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना होगा। इससे शहरों में ईवी का इस्तेमाल अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

'एमपी ईवी तरंग' पोर्टल से मिलेगी जानकारी

राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी जानकारी और प्रोत्साहनों की प्रक्रिया उपलब्ध कराने के लिए ‘एमपी ईवी तरंग’ पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से ईवी से संबंधित जानकारी, उपलब्ध प्रोत्साहनों और उन्हें प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में बताया जा रहा है। इसमें निवेशकों के लिए भी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे के अनुसार, ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर, ईवी नीति और वाहनों के क्षेत्र में किए गए कार्यों के चलते प्रदेश की रैंकिंग में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग ने अपनी रैंकिंग में मध्यप्रदेश को सातवें स्थान पर रखा है। सरकार ने ईवी तरंग पोर्टल भी शुरू किया है जिसमें निवेशकों के लिए संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई गई है। पोर्टल से लोगों और निवेशकों को जानकारी मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि योजनाओं और प्रोत्साहनों की जानकारी आम नागरिकों तक कितनी आसानी से पहुंचती है और उन्हें प्राप्त करने की प्रक्रिया कितनी सरल रहती है।

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रैंकिंग में सुधार के बाद जमीनी क्रियान्वयन की परीक्षा

मध्यप्रदेश की ईवी रैंकिंग में सुधार राज्य के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन इस उपलब्धि को जमीनी स्तर पर बेहतर सुविधाओं में बदलना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। पांच शहरों को मॉडल ईवी सिटी के रूप में विकसित करने, चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार करने तथा ईवी तरंग पोर्टल के जरिए जानकारी उपलब्ध कराने की योजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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