PU Special :स्वामित्व योजना-पहले पटवारियों की हड़ताल के कारण ठप रहा काम, अब सर्वर की धीमी रफ्तार बनी रोड़ा

मप्र में स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की प्रक्रिया धीमी बनी हुई है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 50 लाख से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 19 अक्टूबर तक केवल 27,787 रजिस्ट्रियां दर्ज हुईं। पटवारियों के विरोध के बाद अब सर्वर की समस्या काम में बाधा बन रही है। कई जिलों में लक्ष्य पूरा करने के लिए पटवारियों की रात में भी ड्यूटी लगाई जा रही है।
स्वामित्व योजना-पहले पटवारियों की हड़ताल के कारण ठप रहा काम, अब सर्वर की धीमी रफ्तार बनी रोड़ा
फाइल फोटो

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेखों के निष्पादन एवं पंजीयन की कार्रवाई एक महीने बाद भी गति नहीं पकड़ पाई है। पहले पटवारियों के रजिस्ट्री करने से इनकार के कारण काम प्रभावित हुआ और अब सर्वर की समस्या रजिस्ट्रियों में बाधा बन रही है। लक्ष्य पूरा करने के लिए सागर जिले की केसली और राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील सहित प्रदेश के कई जिलों में पटवारियों की रात में भी ड्यूटी लगाई जा रही है। सरकार ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एक महीने के अभियान में 50 लाख से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा था, लेकिन 19 अक्टूबर तक रजिस्ट्रियों की कुल संख्या 27,787 ही पहुंच सकी।

रात में ड्यूटी, फिर भी काम अटका 

केसली में स्वामित्व योजना के काम को लेकर पटवारियों और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया है। एसडीएम राजनंदनी शर्मा के कथित बयान का ऑडियो वायरल होने के बाद पटवारी संघ ने आपत्ति जताई और माफी की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी भी दी गई। एसडीएम ने बयान का अर्थ गलत निकालने की बात कही है। जीरापुर में भी तहसील स्तर पर रजिस्ट्री का काम पूरा कराने के लिए पटवारियों की रात्रिकालीन ड्यूटी लगाए जाने की जानकारी है। 

‘चार-चार घंटे सर्वर के इंतजार में बैठना पड़ता है’

राजगढ़ जिले के पटवारी लक्ष्मी सिंह सोनगरा के मुताबिक, सर्वर की समस्या लगातार बनी हुई है। इससे रजिस्ट्री की गति नहीं बढ़ पा रही। पटवारियों की ड्यूटी रात में भी लगाई गई है, लेकिन सर्वर के कारण चार-चार घंटे बिना काम के बैठे रहना पड़ता है। बने सिंह गुर्जर ने भी इसी तरह की परेशानी बताई।

50 लाख के लक्ष्य के मुकाबले आंकड़ा 28 हजार से कम 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर को 24,314 और 19 अक्टूबर को 3,473 रजिस्ट्रियां दर्ज हुईं। यानि 27,787। बड़वानी और इंदौर सहित चार जिलों में रजिस्ट्री की संख्या शून्य है। जबकि भोपाल, पन्ना, सिंगरौली, पांढुर्णा, अनूपपुर और रतलाम में एक से दस रजिस्ट्रियां दर्ज हुईं।

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ये हैं सबसे ज्यादा रजिस्ट्री करने वाले जिले

  • छिंदवाड़ा- 267 
  • जबलपुर-211
  • छतरपुर-202
  • सतना-194
  • राजगढ़-190
  • मैहर-147
  • रीवा-140
  • ग्वालियर-129
  • सीहोर-129

 (उपलब्ध आंकड़ों में कुल 49,48,980 भूखंड और 72,71,143 लाभार्थी दर्ज हैं। पटवारियों ने 5,476 मामलों का सत्यापन किया है।)

अभी भी कई विसंगतियां सामने आ रहीं 

पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि सर्वर नहीं चलने की बड़ी समस्या है। सारे लोग एक साथ काम करते हैं तो सर्वर बंद हो जाता है। इसकी शिकायत कई बार कर चुके हैं। दूसरा रजिस्ट्री कैंसिल करने का ऑप्शन नहीं आ रहा है। दो-दो खरीददारों की पोस्ट आ रही है।

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प्रमुख सचिव राजस्व से संपर्क नहीं

रजिस्ट्री की धीमी गति और सर्वर की समस्या को लेकर प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई. रमेश कुमार से संपर्क किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके।

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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