पहले पिछड़े, फिर पलटी बाजी! चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने लूला दा सिल्वा, फ्लावियो बोल्सोनारो का टूटा सपना

ब्रासीलिया। ब्राजील की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कड़े मुकाबले में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल कर लिया है। रविवार, 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के मतदान में लूला को 51.75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि फ्लावियो को 48.25 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। खास बात यह रही कि पहले दौर में पीछे रहने के बाद लूला ने अपनी रणनीति बदली और मतदाताओं का समर्थन जुटाया। उनकी इस जीत से देश में वामपंथी नेतृत्व बना रहेगा लेकिन नई सरकार के सामने कई आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियां होंगी।
पहले दौर में हार, दूसरे में शानदार वापसी
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 4 अक्टूबर को फ्लावियो बोल्सोनारो ने बढ़त बनाई थी। उन्हें 47.03 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। किसी भी उम्मीदवार को आधे से ज्यादा वोट नहीं मिलने के कारण मुकाबला दूसरे दौर तक पहुंचा। इसके बाद लूला ने अपने चुनाव प्रचार में बदलाव किया। उन्होंने युवाओं, गरीब परिवारों और उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की, जिन्होंने पहले दौर में उनका समर्थन नहीं किया था। उनकी रैलियों और प्रचार अभियान ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। आखिरकार दूसरे दौर में लूला ने बढ़त हासिल कर जीत दर्ज की।
पहली बार हुआ ऐसा चुनावी उलटफेर
इस चुनाव का सबसे खास पहलू पहले दौर के नतीजे और अंतिम परिणाम के बीच आया बदलाव है। ब्राजील में लोकतांत्रिक चुनावों की वापसी के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार दूसरे दौर में जीतकर राष्ट्रपति बना। लूला की जीत ने उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ाया है। वहीं, फ्लावियो की हार से दक्षिणपंथी राजनीति को झटका लगा है। फ्लावियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। उनके अभियान को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक रुख से करीबी माना जाता रहा है।
जेल से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
लूला का राजनीतिक जीवन कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। वे पहली बार 2003 में ब्राजील के राष्ट्रपति बने और 2010 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए। इसके बाद 2018 में भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा। हालांकि, बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई और वे चुनावी राजनीति में लौट सके। 2022 में उन्होंने जायर बोल्सोनारो को हराकर तीसरी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया था। अब 2026 की जीत ने उनके राजनीतिक सफर में एक और अध्याय जोड़ दिया है। मजदूरों के बीच अपनी पहचान बनाने वाले लूला गरीब परिवारों के लिए सरकारी मदद बढ़ाने की बात करते रहे हैं।
गरीबों को राहत देने के वादे
चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने कम आमदनी वाले परिवारों की मदद, रोजगार बढ़ाने और लोगों पर आर्थिक दबाव कम करने पर जोर दिया। उन्होंने सरकारी सहायता योजनाओं को मजबूत करने और सार्वजनिक परिवहन को सप्ताहांत में मुफ्त करने जैसे प्रस्ताव भी रखे। हालांकि, इन वादों को पूरा करना आसान नहीं होगा। कई योजनाओं को लागू करने के लिए संसद की मंजूरी और सरकारी बजट की जरूरत पड़ेगी।
संसद और अर्थव्यवस्था बनेंगी बड़ी चुनौती
राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बावजूद लूला के सामने संसद में विरोध का सामना करने की चुनौती होगी। दक्षिणपंथी दलों की मजबूत मौजूदगी के कारण कई प्रस्तावों पर सहमति बनाना मुश्किल हो सकता है। सरकारी खर्च, सामाजिक सहायता और आर्थिक सुधारों को लेकर मतभेद सामने आ सकते हैं। इसके अलावा, बढ़ता सरकारी कर्ज, ऊंची ब्याज दरें और महंगाई भी सरकार के लिए चिंता का विषय हैं। धीमी आर्थिक वृद्धि का असर रोजगार और आम लोगों की खरीदारी पर पड़ सकता है।




















