Raipur News:छत्तीसगढ़ में स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षकों का प्रदेशव्यापी आंदोलन, नियमितीकरण समेत 6 मांगों को लेकर दो दिवसीय धरना

रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यरत संविदा शिक्षक और कर्मचारियों ने नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि और सेवा सुरक्षा सहित छह प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है। रायपुर सहित सभी जिलों में दो दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं, स्पोर्ट्स टीचरों ने भी अपनी लंबित भर्ती को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रदेशभर में शुरू हुआ संविदा शिक्षकों का आंदोलन
राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के संविदा शिक्षक और कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। दो दिवसीय प्रदेशव्यापी धरना आंदोलन के तहत रायपुर के तूता धरना स्थल पर बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी एकत्र हुए।
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नियमितीकरण समेत 6 प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार के सामने छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि, सेवा सुरक्षा, शासकीय सुविधाओं का लाभ, समान कार्य के लिए समान वेतन और संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि संविदा कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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स्पोर्ट्स टीचरों ने भी खोला मोर्चा
इधर, दुर्ग में प्रदेशभर से पहुंचे व्यायाम शिक्षकों (स्पोर्ट्स टीचर) ने भी अपनी लंबित भर्ती की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से मुलाकात की। शिक्षकों का आरोप है कि हाल ही में घोषित 3000 शिक्षक भर्ती में स्पोर्ट्स टीचर का एक भी पद शामिल नहीं किया गया।
2019 के बाद नहीं हुई भर्ती
स्पोर्ट्स टीचरों का कहना है कि वर्ष 2019 के बाद से व्यायाम शिक्षक के पदों पर कोई भर्ती नहीं हुई है। पहले लगभग 300 पद प्रस्तावित थे, लेकिन अंतिम विज्ञापन में इन्हें हटा दिया गया। इससे हजारों प्रशिक्षित अभ्यर्थियों में नाराजगी है।
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नई शिक्षा नीति का दिया हवाला
शिक्षकों ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में प्राथमिक स्तर से शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य किया गया है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में स्पोर्ट्स टीचरों की नियुक्ति नहीं होने से बच्चों को उचित खेल प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि इसका असर राज्य और देश के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है।












