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सिंगरौली के एस्सार पावर मामले में हाईकोर्ट का फैसला, पुनर्वास लाभ की मांग वाली याचिका खारिज

सिंगरौली के एस्सार पावर मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विस्थापन और पुनर्वास लाभ की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने आईबीसी और क्लीन स्लेट सिद्धांत का हवाला दिया।
सिंगरौली के एस्सार पावर मामले में हाईकोर्ट का फैसला, पुनर्वास लाभ की मांग वाली याचिका खारिज
सिंगरौली के एस्सार पावर मामले में हाईकोर्ट का फैसला

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगरौली के एस्सार पावर से जुड़े विस्थापन और पुनर्वास लाभ की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजीव कालगांवकर की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निर्धारित कानूनी प्रावधानों और इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत तय प्रक्रिया के बाद पुराने दावों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ‘क्लीन स्लेट’ सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि आईबीसी के तहत रिजोल्यूशन प्लान मंजूर होने के बाद कंपनी की पुरानी देनदारियों से संबंधित दावों की स्थिति बदल जाती है। ऐसे में नए सिरे से पुराने दावों को कंपनी पर लागू नहीं किया जा सकता।

2011 में दायर हुई थी याचिका

यह मामला सिंगरौली के खैरही गांव निवासी केशव प्रसाद जायसवाल की ओर से वर्ष 2011 में दायर किया गया था। याचिकाकर्ता की जमीन और मकान को एस्सार पावर एमपी लिमिटेड के प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित किया गया था। कंपनी का नाम बाद में महान एनर्जेन लिमिटेड हो गया। याचिकाकर्ता ने मध्यप्रदेश की आदर्श पुनर्वास नीति, 2002 के तहत 5,400 वर्ग फीट का आवासीय भूखंड और अन्य विस्थापन संबंधी लाभ दिए जाने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने कलेक्टर, सिंगरौली के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था।

कलेक्टर ने 2010 में आवेदन किया था खारिज

सिंगरौली कलेक्टर ने 29 अक्टूबर 2010 को याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज कर दिया था। आदेश में कहा गया था कि याचिकाकर्ता अधिग्रहण के लिए जारी धारा-4 की अधिसूचना के बाद संबंधित क्षेत्र में आकर बसा था। इसके साथ ही वहां किया गया निर्माण भी वैध नहीं माना गया था। कलेक्टर के इस आदेश के खिलाफ केशव प्रसाद जायसवाल ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

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हाईकोर्ट ने कलेक्टर के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कलेक्टर के आदेश को तथ्यात्मक आधार पर पारित माना। कोर्ट ने कहा कि आदेश में ऐसी कोई त्रुटि नहीं है, जिसके आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप किया जाए। पीठ ने आईबीसी के तहत रिजोल्यूशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुराने दावों की स्थिति को भी ध्यान में रखा और याचिका में मांगी गई राहत देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही याचिका खारिज कर दी गई।

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दोनों पक्षों की ओर से इन अधिवक्ताओं ने की पैरवी

मामले में शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता ऋत्विक पाराशर और पैनल अधिवक्ता मनोज झा ने पैरवी की। वहीं महान एनर्जेन लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के. अग्रवाल और अधिवक्ता साहिल सोनकुसाले अदालत में उपस्थित हुए। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सिंगरौली में विस्थापन और पुनर्वास लाभ से जुड़ा यह पुराना विवाद याचिकाकर्ता को राहत दिए बिना समाप्त हो गया।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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