मां मोबाइल देख रही थी, चलती ट्रेन से गिरी डेढ़ साल की बच्ची; यात्रियों ने चेन खींचकर बचाया

जबलपुर। घटना 15 सितंबर को कटनी-जबलपुर रेलखंड पर पवन एक्सप्रेस में हुई। ट्रेन कटनी स्टेशन से निकलने के बाद करीब 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, तभी बच्ची इमरजेंसी खिड़की से नीचे गिर गई और करीब 8 फीट नीचे नुकीली गिट्टियों के बीच घायल हालत में मिली। यात्रियों ने तत्काल चेन खींचकर ट्रेन रोकी और ट्रैक की ओर दौड़कर बच्ची को उठाया। उसके सिर, पीठ, हाथ-पैर में चोट लगी थी, जिसके बाद जबलपुर में आरपीएफ और कमर्शियल विभाग की टीम ने उसे अस्पताल पहुंचाया।
लोअर बर्थ पर लिटाकर मोबाइल देख रही थी मां
26 वर्षीय संजीदा खातून मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं और उनके पति मुंबई में नौकरी करते हैं। संजीदा अपनी डेढ़ साल की बेटी के साथ मुजफ्फरपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनल, मुंबई जा रही थीं और बच्ची को लोअर बर्थ पर अपने पास लिटाकर मोबाइल देख रही थीं।
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इमरजेंसी खिड़की तक पहुंची मासूम
इसी दौरान बच्ची उठी और इमरजेंसी खिड़की के पास पहुंच गई। उसने खिड़की में लगी रॉड पकड़कर खड़े होने की कोशिश की, तभी ट्रेन के झटके से उसका संतुलन बिगड़ा और वह खिड़की से बाहर जा गिरी। कुछ देर बाद मां की नजर बच्ची पर गई तो वह बर्थ पर नहीं थी और अचानक बच्ची के गायब होने से मां बेहोश हो गईं।
यात्रियों ने चेन खींचकर बच्ची को खोजा
यात्रियों ने खिड़की से बाहर गिरने की आशंका जताई और तत्काल चेन खींची गई। ट्रेन रुकते ही कुछ यात्री नीचे उतरे और ट्रैक के किनारे बच्ची को तलाशने लगे, जहां वह करीब 8 फीट नीचे गिट्टियों के बीच घायल मिली।
इमरजेंसी खिड़की की सुरक्षा पर उठे सवाल
बच्ची के शरीर पर चोट के निशान थे और खून निकल रहा था। यात्रियों ने उसे उठाकर ट्रेन तक पहुंचाया। घटना के बाद यात्रियों ने इमरजेंसी खिड़की की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए और कहा कि सामान्य खिड़की की तुलना में इस खिड़की में रॉड कम होने से गैप ज्यादा था, इसी गैप से बच्ची बाहर निकल गई।
जबलपुर में अस्पताल पहुंचाया गया
पवन एक्सप्रेस के जबलपुर पहुंचने पर आरपीएफ और कमर्शियल विभाग की टीम ने बच्ची को अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, क्योंकि बच्ची के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट आई थी।
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मां-बेटी को दूसरी ट्रेन से मुंबई भेजा
जबलपुर केआरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब ने बताया कि जबलपुर में उनका कोई परिचित नहीं है और वह बेटी का आगे का इलाज मुंबई में कराना चाहती हैं। इसके बाद रेल प्रबंधन ने मां-बेटी को दूसरी ट्रेन से मुंबई रवाना कर दिया।



















