New Delhi :सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, राज्यों और NHAI को लगाई फटकार

नई दिल्ली। देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे लापरवाही के कारण मौत के गलियारे नहीं बनने चाहिए। सुनवाई के दौरान जस्टिस जेके महेश्वरी और एएस चांदुरकर की बेंच ने चौंकाने वाले आंकड़ों का जिक्र किया। कोर्ट ने बताया कि देश की कुल सड़कों में नेशनल हाईवे सिर्फ 2% हैं, लेकिन यहां करीब 30% सड़क हादसों में मौतें होती हैं, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
मंत्रालय और राज्यों को सख्त निर्देश
कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और सभी राज्य सरकारों को तुरंत प्रभाव से सड़क सुरक्षा के कड़े उपाय लागू करने के आदेश दिए हैं।
क्या-क्या बड़े निर्देश दिए गए
कोर्ट ने हादसों को रोकने के लिए कई ठोस कदम उठाने को कहा है:
- नेशनल हाईवे पर भारी और कमर्शियल वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग पर रोक
- सिर्फ निर्धारित स्थानों पर ही वाहनों को खड़ा करने की अनुमति
- हाईवे किनारे अवैध ढाबों, दुकानों और निर्माण पर तत्काल रोक
- 60 दिनों के भीतर सभी अवैध निर्माण हटाने का आदेश
- निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
सड़क सुरक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है
- हर जिले में हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स का गठन
- हाईवे पर कैमरे, स्पीड मॉनिटर और एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाने के निर्देश
- पुलिस और प्रशासन को नियमित गश्त बढ़ाने का आदेश
- जीवन का अधिकार सिर्फ जीना नहीं, सुरक्षित जीना भी
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कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार सिर्फ जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित वातावरण में जीने की गारंटी भी देता है। यदि लापरवाही के कारण किसी की जान जाती है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी में कमी मानी जाएगी।
हादसों के बाद सख्ती, तय की समयसीमा
यह सख्त रुख 2025 में राजस्थान और तेलंगाना में हुए बड़े सड़क हादसों के बाद सामने आया है, जिनमें कई लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने सभी संबंधित एजेंसियों को 60 दिनों के भीतर इन निर्देशों को लागू करने और 75 दिनों के अंदर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।











