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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश :देशभर से हटेंगे आवारा कुत्ते, नसबंदी के बाद शेल्टर होम में रखने के निर्देश

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देशभर से हटेंगे आवारा कुत्ते, नसबंदी के बाद शेल्टर होम में रखने के निर्देश
आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (फोटो- फाइल))
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों और मवेशियों से जुड़ी देशव्यापी समस्या पर सख्त कदम उठाए हैं। कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े एक मामले में कहा कि, राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला पूरे देश में लागू होगा। अब सवाल उठता है क्या यह आदेश पूरे देश में सुरक्षा और जानवरों के लिए समान रूप से लागू होगा? जानिए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के सभी पहलू।

    देशभर में लागू होगा आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि, राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला पूरे देश में लागू होगा। आदेश के मुताबिक-

    • सभी स्टेट और नेशनल हाईवे से आवारा पशु हटाए जाएंगे।
    • स्कूलों, कॉलेजों, अस्पताल और सरकारी परिसर में बाड़ लगाई जाएगी।
    • पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।

    जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई की। सभी राज्यों के मुख्य सचिव आदेश का पालन सुनिश्चित करेंगे और 3 हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट दायर करेंगे। अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।

    कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें

    निर्देश

    विवरण

    हेल्पलाइन नंबर

    सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर आवारा पशुओं की सूचना के लिए हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित होंगे।

    स्कूल-कॉलेज में बाड़

    2 हफ्ते में सभी स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों में बाड़ लगाई जाएगी।

    नोडल अधिकारी

    रखरखाव और निरीक्षण के लिए प्रत्येक परिसर में नोडल अधिकारी नियुक्त होगा।

    पकड़े गए पशु

    उन्हें उसी जगह वापस नहीं छोड़ा जाएगा। शेल्टर या गौशाला में रखा जाएगा।

    नियमित निरीक्षण

    नगर निगम, नगरपालिका और पंचायत हर 3 महीने में कम से कम एक बार निरीक्षण करेंगे।

    स्कूल, अस्पताल और सरकारी परिसरों में कड़ी सुरक्षा

    सभी डीएम सुनिश्चित करेंगे कि, आवारा कुत्ते स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों में प्रवेश न कर सकें। नियमित निरीक्षण और बाड़ लगाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर या गौशालाओं में रखा जाएगा और दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, यह आदेश केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों के प्रति न्याय सुनिश्चित करने के लिए भी अहम है।

    कैसे शुरू हुआ मामला

    28 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बच्चों के बीच आवारा कुत्तों के काटने और रेबीज से मौतों की मीडिया रिपोर्ट पर स्वयं संज्ञान लिया।

    11 अगस्त 2025: आवारा कुत्तों को दिल्ली-NCR के आवासीय क्षेत्रों से हटाने का आदेश।

    22 अगस्त 2025: कोर्ट ने आदेश दिया कि पकड़े गए कुत्ते नसबंदी के बाद छोड़े जाएं।

    3 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया।

    7 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश पूरे देश में लागू करने का ऐतिहासिक फैसला दिया।

    क्यों जरूरी था यह कदम

    देशभर में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2022 से 2025 तक का डेटा यही दिखाता है कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। देशभर में 37 लाख से ज्यादा डॉग बाइट केस दर्ज हुए हैं। जनवरी 2025 तक अकेले 4.29 लाख मामले दर्ज हो चुके हैं।

    राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में डॉग बाइट के मामले (2022-2025)

    राज्य/केंद्रशासित प्रदेश

    2022 

    (Jan-Dec)

    2023 

    (Jan-Dec)

    2024 

    (Jan-Dec)

    2025 

    (January)

    अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

    345

    528

    455

    52

    आंध्र प्रदेश

    1,92,360

    2,12,146

    2,45,174

    23,180

    अरुणाचल प्रदेश

    2,501

    4,409

    6,388

    714

    असम

    39,919

    94,945

    1,66,232

    20,900

    बिहार

    1,41,926

    2,41,827

    2,63,930

    34,442

    चंडीगढ़

    5,365

    11,782

    8,644

    754

    छत्तीसगढ़

    21,365

    29,221

    38,268

    5,159

    दिल्ली

    6,691

    17,874

    25,210

    3,196

    दादरा नगर हवेली और दमण दीव

    4,169

    5,921

    7,926

    620

    गोवा

    8,057

    11,904

    17,236

    1,789

    गुजरात

    1,69,363

    2,78,537

    3,92,837

    53,942

    हरियाणा

    35,837

    42,690

    60,417

    7,787

    हिमाचल प्रदेश

    15,935

    21,096

    22,909

    2,135

    जम्मू और कश्मीर

    22,110

    34,664

    51,027

    4,824

    झारखंड

    9,539

    31,251

    43,874

    5,344

    कर्नाटक

    1,63,356

    2,32,715

    3,61,494

    39,437

    केरल

    4,000

    71,606

    1,15,046

    11,649

    लद्दाख

    2,165

    2,569

    4,078

    373

    लक्षद्वीप

    0

    0

    0

    0

    मध्य प्रदेश

    66,018

    1,13,499

    1,42,948

    16,710

    महाराष्ट्र

    3,93,020

    4,72,790

    4,85,345

    56,538

    मणिपुर

    4,450

    2,964

    9,257

    798

    मेघालय

    5,302

    9,611

    17,784

    2,466

    मिजोरम

    891

    1,141

    1,873

    179

    नागालैंड

    452

    600

    714

    85

    ओडिशा

    65,396

    92,848

    1,66,792

    24,478

    पुडुचेरी

    11,937

    13,006

    12,148

    894

    पंजाब

    15,519

    18,680

    22,912

    2,164

    राजस्थान

    88,029

    1,03,533

    1,40,543

    15,062

    सिक्किम

    3,845

    6,636

    8,601

    840

    तमिलनाडु

    3,64,435

    4,41,796

    4,80,427

    48,931

    तेलंगाना

    92,924

    1,19,014

    1,21,997

    10,424

    त्रिपुरा

    3,051

    6,510

    9,641

    1,266

    उत्तराखंड

    15,649

    25,623

    23,091

    1,790

    उत्तर प्रदेश

    1,91,361

    2,29,921

    1,64,009

    20,478

    पश्चिम बंगाल

    22,627

    48,664

    76,486

    10,264

    कुल

    21,89,909

    30,52,521

    37,15,713

    4,29,664

    स्रोत: IDSP/IHIP (27-2-2025)

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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