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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर महिला शिक्षक को मुआवजा देने का आदेश दिया, लैंगिक पहचान के चलते स्कूलों ने नौकरी से निकाला था

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर महिला शिक्षक को मुआवजा देने का आदेश दिया, लैंगिक पहचान के चलते स्कूलों ने नौकरी से निकाला था
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रांसजेंडर महिला शिक्षक के मामले में सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने महिला शिक्षक को मुआवजा देने का आदेश दिया है। दरअसल ट्रांसजेंडर महिला शिक्षक उत्तर प्रदेश और गुजरात के दो निजी स्कूलों में नौकरी कर रही थी। लेकिन, उसकी लैंगिक पहचान के चलते दोनों स्कूलों ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी। 

    ट्रांसजेंडर के अधिकारों के लिए SC का महत्वपूर्ण फैसला

    न्यायाधीश जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह फैसला ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण कदम होगा। कोर्ट ने ट्रांसजेंडर और किसी भी लैंगिक पहचान के दायरे में न आने वाले लोगों के लिए रोजगार में समान अवसर की बात कही है। इसके साथ कोर्ट ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मुद्दों की जांच के लिए दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज आशा मेनन की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश भी दिए हैं।

    कोर्ट ने स्कूलों को जारी किए निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने जेन कौशिक बनाम भारत सरकार मामले में सरकार की तरफ से नीति बनाए जाने तक ट्रांसजेंडरों के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कौशिक के साथ हुए व्यवहार और नौकरी से निकाले जाने पर मुआवजे देने का आदेश दिया है। 

    वहीं कोर्ट द्वारा गठित समिति में ट्रांस राइट्स एक्टिविस्ट्स और विशेषज्ञ शामिल हैं। जो समान अवसर नीति, 2019 के ट्रांसजेंडर एक्ट और 2020 नियमों के अध्ययन, उचित व्यवस्था, शिकायत निवारण, जेंडर, नाम बदलने और चिकित्सा जैसे मुद्दों पर काम करेगी। कमेटी में सामाजिक न्याय, महिला और बाल विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों के सचिव भी शामिल रहेंगे। जिसके बाद यह फैसला ट्रांसजेंडरों के अधिकारों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 

    कमेटी करेगी ये महत्वपूर्ण काम

    • समिति के सदस्य ट्रांसजेंडरों के लिए शिक्षा और नौकरी में बराबर भागीदारी की नीति तैयार करने पर अध्ययन      करेंगे।
    • 2019 में बने ट्रांसजेंडर एक्ट और उसकी नीतियों की समीक्षा की जाएगी।
    • ट्रांसजेंडरों के लिए कार्यस्थल, सार्वजनिक स्थल और अन्य जगहों पर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराना।
    • ट्रांसजेंडरों की समस्याओं को हल करने के लिए एक प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था बनाना।
    • ट्रांसजेंडरों के लिए जेंडर और नाम बदलने की प्रक्रिया को आसान करना।
    • ट्रांसजेंडर और जेंडर डायवर्स व्यक्तियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना।
    • जेंडर नॉन-कन्फॉर्मिंग और डायवर्स व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए काम करना। 
    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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