Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

भागीरथपुरा त्रासदी में 21 वी मौत- 49 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम,फाइलों में सिर्फ 18 मौतें दर्ज

भागीरथपुरा त्रासदी में 21 वी मौत-  49 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम,फाइलों में सिर्फ 18 मौतें दर्ज
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। शहर का भागीरथपुरा इलाका इस वक्त भयावह त्रासदी का गवाह बना हुआ है। दूषित पानी से फैली बीमारी ने शनिवार को एक और जिंदगी निगल ली। 49 वर्षीय सुनीता वर्मा की मौत के बाद इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल अब और भी गहरे होते जा रहे हैं।

    भागीरथपुरा की फर्जी वाली गली निवासी सुनीता वर्मा को 7 जनवरी को गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, दूषित पानी पीने से उनकी किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी थी। कई दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शनिवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया।

    पोस्टमार्टम अब रविवार को
    प्रशासन ने मौत के तकनीकी कारणों की पुष्टि के लिए रविवार को पोस्टमार्टम कराने की बात कही है। सवाल यह है कि जब मरीज की हालत शुरू से ही गंभीर थी, तब समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।

    45 मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती
    हालांकि नए मरीजों की संख्या में अब धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन पहले से भर्ती मरीजों की हालत प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है। अब तक 414 मरीज अस्पताल पहुँच चुके हैं, जिनमें से 369 मरीजों को उपचार के बाद घर भेजा गया है। फिलहाल 45 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 11 मरीज आईसीयू में हैं।

    चार मरीज वेंटिलेटर पर
    चार वृद्ध मरीज पिछले करीब एक सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। इन मरीजों को किडनी, लिवर और मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर समस्याएं हो चुकी हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक बताए जा रहे हैं।

    15 नए डायरिया मरीज
    शनिवार को डायरिया के 15 नए मामले सामने आए, जिनमें से दो मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों की विशेष टीम उन मरीजों पर खास निगरानी रख रही है, जो पहले से अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं।

    भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता और सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। सवाल यह नहीं कि मौतों का आंकड़ा कितना बढ़ेगा, सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी कब तय होगी।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

    Latest Posts