जब किसी बच्चे के जन्म के समय या जन्म के तुरंत बाद शरीर पर कोई दाग या निशान दिखाई देता है, तो उसे बर्थमार्क (जन्मदाग) कहा जाता है। यह निशान हल्के भूरे, काले, लाल या नीले रंग के हो सकते हैं। जन्मदाग शरीर के किसी भी हिस्से-चेहरा, हाथ, पैर या पीठ पर दिख सकते हैं।
क्या जन्मदाग हमेशा रहता है?
कुछ जन्मदाग पूरी जिंदगी बने रहते हैं, जबकि कई निशान समय के साथ हल्के पड़ जाते हैं या अपने आप खत्म हो जाते हैं। यह पूरी तरह बर्थमार्क के प्रकार पर निर्भर करता है।
बच्चों में जन्मदाग क्यों होता है?
डॉक्टर्स के मुताबिक, ज्यादातर बर्थमार्क अपने आप बनते हैं। इनका किसी गंभीर बीमारी से आमतौर पर कोई संबंध नहीं होता। प्रेग्नेंसी में मां के खाने-पीने या गलती से बर्थमार्क होना सिर्फ एक मिथक है। करीब 80% नवजात बच्चे किसी न किसी बर्थमार्क के साथ पैदा होते हैं। कई मामलों में इसका सटीक कारण पता नहीं चल पाता। बहुत कम केस में यह वंशानुगत भी हो सकता है।
ये तब बनते हैं जब त्वचा के अंदर ब्लड सेल्स ठीक से विकसित नहीं हो पातीं। इसमें शामिल हैं-
ये तब बनते हैं जब त्वचा में पिगमेंट ज्यादा बनने लगता है। इससे उस जगह की स्किन का रंग बाकी हिस्सों से अलग दिखता है।
डॉक्टर्स का कहना है कि कई बर्थमार्क समय के साथ खुद ही हल्के हो जाते हैं। खासतौर पर मैकुलर स्टेन और हेमंगियोमा अक्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं। ज्यादातर जन्मदाग सेहत के लिए खतरनाक नहीं होते। हालांकि, कुछ मामलों में ये बच्चे या व्यक्ति के आत्मविश्वास (कॉन्फिडेंस) को प्रभावित कर सकते हैं।
अगर जन्मदाग तेजी से बढ़ रहा हो, रंग या आकार बदल रहा हो, दर्द या खून आ रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।