बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार (8 जनवरी 2026) को सुनामगंज जिले में 19 वर्षीय हिंदू युवक जॉय महापात्रो की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि एक स्थानीय व्यक्ति ने पहले जॉय के साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर उसे जबरन जहर खिलाया गया।
गंभीर हालत में जॉय को सिलहट एमएजी ओस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इससे कुछ दिन पहले नरसिंदी जिले में भी एक हिंदू व्यक्ति की हत्या की गई थी। मंगलवार (6 जनवरी 2026) को पालाश उपजिला के चारसिंधुर बाजार इलाके में 40 वर्षीय मोनी चक्रवर्ती पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, जिसमें उनकी मौत हो गई।
मोनी चक्रवर्ती की हत्या से कुछ घंटे पहले ही जेसोर जिले में एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां एक हिंदू व्यवसायी और अखबार के कार्यकारी संपादक की अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी।
जेसोर के केशबपुर उपजिला में एक स्कूल शिक्षक के बेटे प्रताप की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रताप पिछले दो वर्षों से कोपालिया बाजार में आइस फैक्ट्री चला रहे थे। सोमवार (5 जनवरी 2026) की शाम कुछ लोगों ने उन्हें फैक्ट्री के बाहर बुलाया और फिर पास की एक गली में ले जाकर गोली मार दी।
बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं का यह सिलसिला 18 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था। मैमनसिंह जिले में कथित ईशनिंदा के आरोप में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को कट्टरपंथी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी
इसी दौरान 50 वर्षीय हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास पर भी बेरहमी से हमला किया गया। हमलावरों ने उन्हें जिंदा जला दिया। गंभीर रूप से झुलसने के बाद तीन दिन इलाज चलने के दौरान उनकी भी मौत हो गई।
लगातार हो रही इन घटनाओं से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी इन हत्याओं को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।