PU Special :‘गलत मूलांक' और 'सिग्नेचर' ने बढ़ाई दूरियां, अंधविश्वास के फेर में टूटने की कगार पर रिश्ते

पल्लवी वाघेला, भोपाल। पति-पत्नी के बीच मतभेद की वजह अक्सर स्वभाव, आर्थिक परेशानी, परिवार या सोशल मीडिया का हस्तक्षेप रहता है, लेकिन अंधविश्वास भी रिश्तों की डोर कमजोर करने वाले कारक के रूप में सामने आ रहा है। बीते माह भोपाल में ऐसे ही दो मामले पहुंचे हैं। यहां एक परिवार 14 साल की शादी के बाद अंक ज्योतिष के चक्कर में टूटने की कगार पर पहुंच गया, जबकि दूसरे मामले में पति ने घर की आर्थिक परेशानियों का जिम्मेदार पत्नी के हस्ताक्षर को मान लिया। विवाद इस कदर बढ़ा है कि दंपति ने अलग होने का मन बना लिया।
एक साल में ऐसे 8 मामले
एक्सपर्ट जहां इनके रिश्तों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं उनका कहना है कि हर साल मप्र में सामने आने वाले पारिवारिक विवाद में करीब 2 फीसद मामले ऐसे होते हैं, जिनमें विवाद का मूल कारण अंधविश्वास के रूप में सामने आता है। इनमें अंक ज्योतिष, कुंडली, हस्ताक्षर, वास्तु, तंत्र-मंत्र, रूढ़िवादी परंपरा और बाबाओं की सलाह से जुड़े विवाद प्रमुख हैं। साल 2025 में भोपाल में तलाक व सेपरेशन के ऐसे ही 8 मामले प्रकाश में आए। वहीं, इंदौर और जबलपुर में जानकारी में आए इन मामलों की संख्या क्रमश: 5 और 11 रही।
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केस-1 मूलांक से विवाद
भोपाल की शाहपुरा क्षेत्र निवासी एक महिला शादी के 14 साल बाद अपने पति से अलग होना चाहती है। उसका कहना है कि उसने गलत मूलांक वाले पुरुष से शादी कर ली है। मीडिएशन सेंटर में उसने कहा कि एक बाबा ने उसे बताया है कि इसी कारण पति की तरक्की नहीं हो रही और पत्नी का जीवन भी कभी नहीं सुधरेगा। मामले में पति ने बताया कि पत्नी कुछ दिनों से उससे दूरी बनाने लगी थी। जब पूछा तो पत्नी ने तलाक मांग लिया। बता दें, पत्नी का जन्म 23 और पति का जन्म 16 तारीख को हुआ है। इस हिसाब से पत्नी का मूलांक 5 और पति का 7 हैं। बाबा के अनुसार यह दोनों मूलांक विरोधाभास वाले हैं और इनका तालमेल मुश्किल है।
केस-2 पत्नी के साइन से उड़ रहा पैसा
डालसा पहुंचे मामले में पति का मानना है कि पत्नी के हस्ताक्षर अशुभ हैं। उसका दावा है कि पत्नी के सिग्नेचर की वजह से घर में पैसा नहीं टिकता और आर्थिक नुकसान होता है। उसने पत्नी पर हस्ताक्षर बदलने का दबाव बनाया, लेकिन पत्नी का कहना है कि यह सिग्नेचर वह लंबे समय से करती आ रही है। साथ ही उसने पति की इस बात को अंधविश्वास करार देते हुए सिग्नेचर बदलने से इंकार कर दिया। मामला इतना बढ़ा कि पत्नी ने पति को समझाइश देने डालसा में आवेदन दिया। वहीं, पति रील में देखे इस ज्ञान पर भरोसा कर अपनी जिद पर अड़ा है।
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काउंसलिंग से दूर हो रहे भ्रम
जब व्यक्ति लगातार असफलताओं या तनाव से गुजरता है, तो वह किसी चमत्कारी समाधान की तलाश में अंधविश्वास का शिकार हो सकता है। कोशिश रहती है कि वैज्ञानिक सोच और आपसी संवाद के माध्यम से अंधविश्वास के कारण पैदा हुई गलतफहमियों को दूर किया जाए, ताकि परिवार टूटने से बच सके। ऐसे अनेक मामले आते हैं जहां काउंसलिंग के बाद समझ आता है कि विवाद के पीछे कोई अंधविश्वास या रूढ़िवादी सोच वजह है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में सुलह हो जाती है।
शैल अवस्थी, काउंसलर, मीडिएशन सेंटर












