सोलर मैन का नया मिशन, कम एनर्जी में जीने को बना लो "फैशन", लिमिट और लोकलाइज्ड के मंत्र से घटेगा कार्बन उत्सर्जन

नितिन साहनी, भोपाल। इंडिया के सोलर मैन प्रोफेसर चेतन सोलंकी अब सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता के साथ एक और मिशन में जुट गए हैं। वे अब लोगों से अपील कर रहे हैं कि कम से कम एनर्जी में जीवन जीने को ही अपना फैशन बना लें। इतना ही नहीं, अब वे लोगों को सोलर एनर्जी अपनाने के साथ-साथ ये भी समझाते हैं कि फ्रिज और एसी को बाय-बाय कर दें.... कपड़े भी बगैर प्रेस किए हुए पहनें। प्रोफेसर सोलंकी शुक्रवार को भोपाल में थे और भोज ओपन यूनिवर्सिटी में उन्होंने अपने मिशन को लेकर खुलकर बातें कीं। वे तो यह तक कहते हैं कि उनके घर में जब दोनों बेटियों की शादी होगी, तो वे केवल उन्हीं मेहमानों को बुलाएंगे जो बगैर प्रेस किए हुए कपड़े पहनकर आएंगे।
लिमिट एंड लोकलाइज्ड का सिद्धांत, AMG का दिया फॉर्मूला
सोलर मैन का दावा है कि विकास और पर्यावरण एक दूसरे के विरोधी होते हैं। यही कारण है कि कार्बन उत्सर्जन 10 सालों में 45 प्रतिशत कम करने का टारगेट विकसित देश ही हासिल नहीं कर पाए। ऐसे में प्रकृति की सीमित क्षमताओं को देखते हुए कंजम्पशन लिमिट विथ लोकलाइज्ड प्रोडक्शन का सिद्धांत बनाया है। इसके लिए प्रकृति के संसाधन निश्चित मात्रा में इस्तेमाल किए जाएं और उपयोग की वस्तुएं लोकल हों। इसके साथ ही उन्होंने जनता के लिए एनर्जी का AMG फॉर्मूला भी तैयार किया है। इसका सीधा सा फंडा है AVOID, MINIMISE और GENERATE। कोशिश करें कि एनर्जी की जरूरत ही न पड़े। अगर जरूरत बहुत हो तो कम के कम उतनी ही उपयोग करें जितने में काम चल जाए। इसके अलावा अगर ज्यादा जरूरत हो तो खुद ही ऊर्जा पैदा करें। उन्होंने तो लोगों को जागरुक करने के लिए अपनी शर्ट पर ही लिखवा लिया है... "आई एम एनर्जी लिटरेट, आर यू..?"





















