हत्या के आरोपी को जेल भेजा, दूसरी ओर उसी की गर्भवती पत्नी को अस्पताल पहुंचाकर निभाया मानवीय दायित्व
सोहागपुर। पुलिस की पहचान आमतौर पर अपराधियों की धरपकड़, कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से होती है, लेकिन पुलिस का एक चेहरा ऐसा भी है, जो वर्दी के पीछे छिपी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक दायित्वों को उजागर करता है।
सोहागपुर पुलिस ने एक ऐसे ही संवेदनशील मामले में अपनी दोहरी भूमिका का परिचय दिया है। जहां एक ओर पुलिस ने बुजुर्ग दंपती की हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर जेल पहुंचाया। वहीं दूसरी ओर उसी आरोपी की गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर तत्काल गांव पहुंचकर अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाई।
मामला ग्राम रैनीपानी निवासी 38 वर्षीय विनीता पति कमलेश उईके का है। विनीता को प्रसव पीड़ा होने पर आपातकालीन पुलिस सहायता सेवा डायल 112 पर मदद मांगी गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी ने परिस्थितियों की गंभीरता और महिला की स्थिति को देखते हुए तत्काल 112 सहायता वाहन को महिला पुलिसकर्मी के साथ गांव रवाना किया।
महिला को तत्काल जिला अस्पताल किया रेफर
पुलिस सहायता वाहन में तैनात प्रधान आरक्षक मनीराम पटेल, महिला आरक्षक नेहा रघुवंशी और पायलट अभिषेक तत्काल रैनीपानी पहुंचे। पुलिस टीम ने प्रसव पीड़ा से परेशान विनीता को अपने वाहन से शासकीय अस्पताल सोहागपुर पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक परीक्षण और उपचार के बाद बताया कि गर्भस्थ शिशु की धड़कन कम चल रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिला को तत्काल जिला अस्पताल नर्मदापुरम रेफर किया गया। इसके बाद 108 एंबुलेंस की सहायता से उसे जिला अस्पताल भेजने की व्यवस्था की गई।
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एक ही परिवार से जुड़ी दो विपरीत परिस्थितियां
गौरतलब है कि विनीता के पति कमलेश उईके द्वारा गत रात्रि अपने ही माता-पिता की हत्या कर दी गई थी। दोहरे हत्याकांड के बाद सोहागपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और न्यायिक अभिरक्षा में उप जेल पिपरिया भेज दिया।
इस गंभीर आपराधिक घटना के बाद परिवार की स्थिति बेहद कठिन हो गई थी। ऐसे समय में जब विनीता को प्रसव पीड़ा हुई तो पुलिस ने उसके पति के अपराध को उसकी पत्नी की चिकित्सा सहायता के आड़े नहीं आने दिया।
यहां सोहागपुर पुलिस की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। जिस पुलिस ने हत्या के आरोपी को कानून के शिकंजे में लेकर जेल पहुंचाया, उसी पुलिस ने उसकी गर्भवती पत्नी को भी संकट की घड़ी में अकेला नहीं छोड़ा। पुलिस ने न तो पारिवारिक परिस्थितियों को नजरअंदाज किया और न ही महिला की मदद को आरोपी के अपराध से जोड़कर देखा।
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टीआई त्रिपाठी की पहल से मिली तत्काल मदद
इस पूरे घटनाक्रम में थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी की संवेदनशील पहल और तत्परता विशेष रूप से परिलक्षित हुई। उन्होंने सूचना मिलते ही स्टाफ को तत्काल गांव भेजकर महिला को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था कराई। उनके मार्गदर्शन में प्रधान आरक्षक मनीराम पटेल, महिला आरक्षक नेहा रघुवंशी और वाहन चालक अभिषेक ने जिस तत्परता से अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह सराहनीय है।
यह घटनाक्रम बताता है कि पुलिस का दायित्व केवल अपराधी को पकड़कर जेल पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसे प्रत्येक नागरिक की सहायता करना भी उसकी जिम्मेदारी है। अपराध के प्रति कठोरता और जरूरतमंद के प्रति संवेदनशीलता का यह संतुलन ही पुलिस की मानवीय पहचान को मजबूत करता है।
सोहागपुर पुलिस की यह पहल निश्चित रूप से सराहना योग्य है, जहां कानून के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ मानवता और सामाजिक सरोकारों को भी सर्वोपरि रखा गया।























