अनुवाद में करियर की नई राहें, सीहोर कॉलेज में विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को बताए रोजगार के अवसर

सीहोर। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि अलग-अलग संस्कृतियों, विचारों और ज्ञान को जोड़ने वाला सेतु भी है। बदलते डिजिटल दौर में जब भारतीय भाषाओं के साथ वैश्विक भाषाओं के बीच संवाद लगातार बढ़ रहा है, ऐसे समय में अनुवाद का क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार और करियर की नई संभावनाएं लेकर सामने आया है। इसी विषय को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, चंद्रशेखर आजाद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सीहोर में ‘अनुवाद के क्षेत्र में करियर की संभावनाएं’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
अनुवाद को करियर के रूप में समझने का अवसर
महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग, भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ एवं स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को अनुवाद के क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों और भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराना था। नवीन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विषय विशेषज्ञ से अनुवाद की बदलती दुनिया और उससे जुड़े रोजगार के अवसरों को समझा।
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भारतीय भाषाओं के बढ़ते संवाद में अनुवाद की भूमिका
कार्यशाला की विषय विशेषज्ञ सुश्री ऐशिता राठौर, सहायक प्राध्यापक, आईआईआईटी भोपाल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए वर्तमान समय में अनुवाद की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ वैश्विक भाषाओं के बीच संवाद बढ़ने से अनुवाद की आवश्यकता भी लगातार विस्तृत हो रही है। भाषा की समझ रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह क्षेत्र रचनात्मकता के साथ व्यावसायिक अवसर भी उपलब्ध करा सकता है।
सरकारी नौकरी से फ्रीलांसिंग तक अवसर
सुश्री राठौर ने विद्यार्थियों को अनुवाद के क्षेत्र में शासकीय, अशासकीय और फ्रीलांसिंग से जुड़े रोजगार अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनुवाद का दायरा केवल पुस्तकों और साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि आज प्रशासन, तकनीक, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित अनेक क्षेत्रों में कुशल अनुवादकों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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साहित्य से तकनीक और डिजिटल कंटेंट तक विस्तार
विशेषज्ञ ने अनुवाद के विभिन्न आयामों से विद्यार्थियों को परिचित कराया। साहित्यिक अनुवाद के साथ तकनीकी एवं प्रशासनिक अनुवाद, मीडिया कंटेंट, डिजिटल सामग्री, उपशीर्षक और दुभाषिया कार्य जैसे क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही मशीन ट्रांसलेशन और एआई आधारित अनुवाद को उभरते हुए क्षेत्र के रूप में समझाते हुए विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया।
भाषा दक्षता के साथ डिजिटल कौशल भी जरूरी
कार्यशाला में विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि अनुवाद के क्षेत्र में केवल भाषायी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। भाषा पर मजबूत पकड़ के साथ डिजिटल कौशल, आधुनिक तकनीकों की समझ और बदलते कार्यक्षेत्र के अनुरूप स्वयं को विकसित करना भी जरूरी है। विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों को अनुवाद को एक विकसित होते हुए व्यावसायिक कौशल और संभावनाओं से भरे करियर क्षेत्र के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का किया समाधान
कार्यशाला के अंत में विद्यार्थियों ने अनुवाद के क्षेत्र में रोजगार, आवश्यक दक्षताओं और आधुनिक तकनीकों से जुड़े सवाल विशेषज्ञ के समक्ष रखे। सुश्री ऐशिता राठौर ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान किया।
शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम का कुशल संचालन अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नोरा रूथ कुमार ने किया। डॉ. मंगल सिंह भाटिया ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. नितिन बातव, डॉ. पुष्पेन्द्र परसेंडिया, श्रीमती पूर्णिमा सिंह परिहार, डॉ. तृप्ता झा, डॉ. सुशीला पटेल, डॉ. जितेंद्र आर्य, डॉ. कैलाश विश्वकर्मा, डॉ. धर्मेन्द्र वर्मा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।




















