PU Special :वन की कटाई की भरपाई-सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक के बदले सागर में विकसित किया जाएगा जंगल

सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना के कारण नष्ट होने वाले वनों की भरपाई के लिए सागर जिले के बरखेड़ा खुमान गांव की 52.78 हेक्टेयर सरकारी जमीन को संरक्षित वन घोषित किया गया है। परियोजना के लिए 5.70 लाख से छह लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान है। क्षतिपूर्ति वनीकरण के तहत प्रति हेक्टेयर 1,200 पौधे लगाने और उनकी देखरेख की योजना है।
वन की कटाई की भरपाई-सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक के बदले सागर में विकसित किया जाएगा जंगल
फाइल फोटो

संतोष चौधरी, भोपाल। सिंगरौली के विवादित धिरौली कोल ब्लॉक प्रोजेक्ट के कारण नष्ट होने वाले वनों की भरपाई अब सागर जिले में की जाएगी। इसके लिए सागर जिले के बरखेड़ा खुमान गांव की 52.78 हेक्टेयर सरकारी जमीन को राज्य सरकार ने संरक्षित वन घोषित कर दिया है। इस जमीन पर नए सिरे से पौधे लगाकर जंगल विकसित किया जाएगा। धिरौली कोल ब्लॉक अडानी समूह को आवंटित है। स्थानीय निवासियों, पर्यावरणविदों और कांग्रेस ने इस परियोजना का भारी विरोध किया था।

पौधे लगाने के साथ ही सुरक्षा की भी जवाबदारी

भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने धिरौली परियोजना के तहत सिंगरौली वनमंडल की वनभूमि के उपयोग की मंजूरी दी थी।वनभूमि के गैर-वानिकी उपयोग के बदले नियमानुसार क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए गैर-वन सरकारी जमीन उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी प्रक्रिया के तहत जमीन वन विभाग को हस्तांतरित की थी। संरक्षित वन घोषित करने से पहले जमीन पर मौजूद अधिकारों और दावों की जांच की गई। इसमें किसी व्यक्ति या समुदाय का निजी अथवा सामुदायिक अधिकार नहीं पाया गया। अब यह जमीन वन विभाग के संरक्षण में रहेगी। यह पूरी तरह से राज्य शासन की संपत्ति है। यहां पौधरोपण के साथ पौधों की सुरक्षा और उनके रखरखाव की व्यवस्था की जाएगी।

करीब छह लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान

धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना के लिए लगभग 1,397.54 हेक्टेयर वनभूमि को गैर-वानिकी उपयोग के लिए मंजूरी दी गई है। इस क्षेत्र में 5.70 लाख से छह लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान है। इनमें साल, सागौन, महुआ और अचार जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं।

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दूसरे जिलों में भी जमीन चिह्नित 

क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए प्रदेश के अन्य जिलों में भी सरकारी जमीन को वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने की तैयारी है।

शिवपुरी: 757.88 हेक्टेयर

आगर मालवा: 596.21 हेक्टेयर

रायसेन: 9.89 हेक्टेयर

पौधरोपण से रखरखाव तक की योजना

  • सघन पौधरोपण: प्रस्तावित योजना के अनुसार प्रति हेक्टेयर 1,200 पौधे लगाने का लक्ष्य।
  • मिश्रित वनीकरण: स्थानीय जलवायु के अनुकूल फलदार, छायादार और अन्य प्रजातियों के पौधे लगाने पर जोर।
  • देखरेख: कैम्पा फंड से मिलने वाली राशि का उपयोग पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और 5 से 10 वर्षों के रखरखाव के लिए किया जाएगा।

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सिंगरौली की भरपाई सागर में संभव नहीं

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि सिंगरौली में करीब 42 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। यहां कोल प्रोजेक्ट के लिए सात लाख हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। इसकी भरपाई सागर जिले में पौधे लगाकर करने की योजना है, लेकिन एक क्षेत्र के जंगलों के नुकसान की भरपाई दूसरे क्षेत्र में करना उचित नहीं है। दोनों क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां और जैव विविधता अलग हैं। नए पौधे लगाने से पुराने जंगलों का महत्व वापस नहीं मिल सकता। इसका असर पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधे लगाए जाएंगे

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) शुभरंजन सेन का कहना है कि धिरौली कोल प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाली वनभूमि की क्षतिपूर्ति के लिए सागर जिले के बरखेड़ा खुमान गांव की 52.78 हेक्टेयर सरकारी जमीन को संरक्षित वन घोषित किया गया है। इस जमीन पर स्थानीय जलवायु के अनुकूल विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। पौधरोपण के बाद उनकी सुरक्षा और देखरेख की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि विकसित होने वाला वन क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सके। 

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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