PU Special :जबलपुर में 1952 से मुस्लिम परिवार बना रहा रावण का पुतला, नई पीढ़ी भी नहीं लेती कोई मेहनताना

जबलपुर में 1952 से मनाए जा रहे पंजाबी दशहरा पर्व के लिए एक मुस्लिम परिवार की पांचवीं पीढ़ी रावण और कुंभकरण के 75 फीट ऊंचे पुतले तैयार कर रही है। शेख आलम से शुरू हुई यह परंपरा अब शिखार आलम अपने बेटे अदनान के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। खास बात यह है कि परिवार पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन के लिए पुतले बनाने का मेहनताना नहीं लेता। इस वर्ष परिवार विभिन्न रामलीलाओं के लिए 14 पुतले भी तैयार कर रहा है।
जबलपुर में 1952 से मुस्लिम परिवार बना रहा रावण का पुतला, नई पीढ़ी भी नहीं लेती कोई मेहनताना
जबलपुर। दशहरे के लिए मुस्लिम परिवार द्वारा बनाया जा रहा रावण।

सतीश श्रीवास्तव, जबलपुर। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद पाक से आए मुस्लिमों और पंजाबियों ने संस्कारधानी को अपना स्थाई ठीया बनाया। इसके साथ ही पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन का गठन हुआ और वर्ष 1952 से पंजाबी दशहरा पर्व की शुरूआत हुई। खास बात ये है कि इन 74 वर्षों में जबलपुर का ही एक मुस्लिम परिवार पंजाबी दशहरा के लिए रावण का पुतला बनाते चला आ रहा है। वर्तमान में इस मुस्लिम परिवार की पांचवी पीढ़ी रावण और कुंभकरण के 75 फीट ऊंचे पुतले का निर्माण कर रहा है।

पांचवीं पीढ़ी बना रही रावण का पुतला

गौरतलब है कि पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन (PHA) हर वर्ष नवमी तिथि का दशहरा पर्व मनाते चला आ रहा है। वर्तमान में पुतले का निर्माण कर रहे 54 वर्षीय शिखार आलम ने बताया कि पुतला निर्माण में उनकी पांचवीं पीढ़ी है। वे बताते हैं कि सबसे पहले उनक परदादा शेख आलम ने रावण और कुंभकरण के पुतले का निर्माण किया था। सबसे पहले कोलतार और लकड़ी के बत्ते से 20 फीट के रावण का निर्माण किया गया था।

परिवार का काम संभाला

परदादा के बाद उनके दादाजी शेख फरीद ने पुतले का निर्माण कार्य संभाला। उनके साथ उनके पिता इजराइल आलम ने भी पुतला निर्माण की परंपरा को निभाया। वर्तमान में वे अपने बेटे अदनान के साथ पुतला बनाने का काम कर रहे हैं।

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जन्माष्टमी के बाद शुरू करते हैं काम

शिखार ने बताया कि वे PHA के लिए जन्माष्टमी के बाद पुतले का निर्माण शुरू कर देते हैं। अब बांस की खपच्चियों की मदद से पुतला तैयार किए जा रहे हैं। उनके इस कार्य में वंशकारों की मदद ली जा रही है। पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन के पुतला निर्माण में उनका  परिवार किसी प्रकार की आर्थिक राशि नहीं लेता है, सिर्फ रॉ मटेरियल पीएचए उपलब्ध कराता आ रहा है। इस संबंध में पीएचए के पीआरओ उमेश शर्मा ने बताया कि पुतला निर्माण के बाद उसमें आतिशबाजी और लाइटिंग का काम अखिलेश नायक कर रहे हैं।

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रामलीला उत्सवों के  लिए 14 'रावण' बना रहे

आनंद नगर अधारताल निवासी शिखार आलम ने बताया कि वे शहर की विभिन्न रामलीला के लिए 14 पुतले तैयार कर रहे हैं। इस वर्ष उन्हें शहर की विभिन्न रामलीला के लिए 40 फीट तक के पुतले का ऑर्डर मिला है।

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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