कचरे में फेंकी किताबों में मिला खजाना, शेर्लक होम्स की 1890 वाली फर्स्ट-एडिशन कॉपी 11,520 पाउंड में बिकी

लंदन। सर आर्थर कॉनन डॉयल के शेर्लक होम्स उपन्यासों में से एक, 'द साइन ऑफ फोर' की एक दुर्लभ फर्स्ट-एडिशन कॉपी, इंग्लैंड के श्रूस्बरी में स्थित ऑक्सफैम चैरिटी शॉप में दान की गई किताबों के बीच मिली। इसे बाद में 11,520 पाउंड में बेचा गया। ऑक्सफैम की ऑफिशियल प्रेस रिलीज के अनुसार, 1890 में छपी इस किताब को वहां के स्टाफ ने पहचान लिया। उन्हें इसका महत्व समझ आ गया था, इसलिए उन्होंने इसकी सही कीमत पता करने के लिए मदद ली। बाद में इसे बोनहैम्स ऑक्शन हाउस में बेच दिया गया। इस अनएक्सपेक्टेड सेल से एक साधारण दान, ऑक्सफैम के ह्यूमैनिटेरियन कामों के लिए एक बड़ा कंट्रीब्यूशन बन गया।
एक साधारण दान कैसे एक दुर्लभ खोज बन गया
यह किताब श्रूस्बरी स्थित ऑक्सफैम बुकशॉप में एक रेगुलर सपोर्टर द्वारा दान की गई किताबों के साथ आई थी। शुरुआत में चैरिटी को मिली कई पुरानी किताबों के बीच यह भी बस एक आम पुराने नॉवेल जैसी लग रही थी। लेकिन, शॉप मैनेजर टॉम कॉटन ने पहचान लिया कि यह शर्लक होम्स की शुरुआती स्टोरीज में से एक है। किसी पुरानी किताब को फर्स्ट-एडिशन के तौर पर पहचानने के लिए सिर्फ उसका टाइटल जानना काफी नहीं होता। पब्लिकेशन की डिटेल, बाइंडिंग, किताब की कंडीशन और अन्य खास फीचर्स को देखकर यह तय किया जा सकता है कि क्या वह बुक अर्ली प्रिंट (शुरुआती प्रिंट) की है और क्या कलेक्टर्स के लिए उसका कोई स्पेशल वैल्यू है। कॉटन ने किताब की और डिटेल में जांच के लिए अपने साथियों और एक्सपर्ट्स से मदद मांगी। ऑक्सफैम की बुक डेवलपमेंट टीम और अन्य कॉन्टैक्ट्स ने किताब का वैल्यूएशन करने में हेल्प की, जिसके बाद इसे स्पेशलिस्ट ओपिनियन लेने और ऑक्शन के लिए भेजा गया।
चैरिटी-शॉप के स्टाफ की पहचान में अहम भूमिका रही
यह घटना दिखाती है कि चैरिटी-शॉप के स्टाफ दान में मिली कीमती चीजों की पहचान करने में कितनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। जिन किताबों को आमतौर पर साधारण सेकंड-हैंड बुक्स मान लिया जाता है, वे कभी-कभी बहुत कीमती और दुर्लभ कलेक्टेबल्स निकल सकती हैं। खासकर तब जब उनमें उनके ओरिजिनल पब्लिकेशन से जुड़ी विशेषताएं मौजूद हों।
1890 का एडिशन क्यों मायने रखता है
'द साइन ऑफ फोर' को आर्थर कॉनन डॉयल ने लिखा था और यह पहली बार 1890 में पब्लिश हुई थी। यह 'ए स्टडी इन स्कारलेट' के बाद शेर्लक होम्स का दूसरा नॉवेल है। इसी नॉवेल से फेमस डिटेक्टिव शेर्लक होम्स और उनके साथी डॉ. जॉन वॉटसन की शुरुआत हुई थी। कहानी में होम्स और वॉटसन एक ऐसे मिस्ट्री की जांच करते हैं। इसमें एक मिसिंग पर्सन, एक प्राइसलेस ट्रेजर और भारत से जुड़ी घटनाओं की एक कॉम्प्लेक्स चेन शामिल है। इसमें लॉजिक, एडवेंचर और मिस्ट्री का ऐसा मेल है, जिसने पॉपुलर लिटरेचर में इस फिक्शनल डिटेक्टिव की जगह पक्की करने में मदद की।ऑक्सफैम में मिली इस खास कॉपी की पहचान 'फर्स्ट एडिशन, फर्स्ट इश्यू' के तौर पर हुई। इसमें इसकी ओरिजिनल रेड क्लॉथ बाइंडिंग सेफ थी, और कवर तथा स्पाइन पर गोल्डन लेटर्स में कुछ लिखा हुआ था। फीचर्स की मदद से इसे बाद के एडिशंस से अलग पहचानना आसान हो गया, जिससे कलेक्टर्स के बीच इसकी अहमियत बढ़ गई।
किताब में इसके पिछले ओनर्स से जुड़ा एक क्लू भी मिला
एक 'ओनरशिप बुकप्लेट' से पता चला कि इसके पिछले मालिक 'ग्वेरनाफेल, नाइटॉन' के जेम्स बर्गेस बूट थे। वह रैडनॉरशायर के 'हाई शेरिफ' के पद पर रह चुके थे। इस तरह की डिटेल किताब को उसके पिछले मालिक और समय के साथ उसके सफर से जोड़कर, उसमें हिस्टोरिकल इंटरेस्ट पैदा कर सकती है। एक चैरिटी शॉप से 11,520 पाउंड (14,63,012 भारतीय रुपए) की नीलामी तक किताब की जांच-परख के बाद, इसे बोनहैम्स को सौंप दिया गया। यहां 26 मार्च, 2026 को यह 11,520 पाउंड में नीलाम हुई। इस सेल की खबर 27 मार्च को सामने आई और 30 मार्च को ऑक्सफैम ने अपनी ऑफिशियल प्रेस रिलीज जारी की। चैरिटी के लिए, इस रिजल्ट का मतलब था कि एक अनएक्सपेक्टेड डोनेशन से उनके काम के लिए बड़ी रकम जुटाई जा सकी। ऑक्सफैम ने बताया कि डोनेट की गई किताबों और अन्य आइटम्स से मिलने वाली रकम उनके व्यापक ह्यूमैनिटेरियन वर्क में हेल्प करती है। इसमें कॉन्फ्लिक्ट जोन में लाइफ-सेविंग असिस्टेंस पहुंचाना और क्लीन वॉटर तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने के एफर्ट शामिल हैं।




















