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नरवाई जलाने की जरूरत नहीं, खेत में ही खाद बनेगी पराली; किसानों को मिल रहा आधुनिक यंत्र का मौका

सोहागपुर में किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। सुपर SMS कृषि यंत्र के लिए 29 अक्टूबर 2026 तक आवेदन करें। 30 अक्टूबर को लॉटरी निकाली जाएगी।
नरवाई जलाने की जरूरत नहीं, खेत में ही खाद बनेगी पराली; किसानों को मिल रहा आधुनिक यंत्र का मौका

सोहागपुर। फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली और नरवाई को किसान अक्सर जला देते हैं, लेकिन यही फसल अवशेष मिट्टी की सेहत सुधारने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से पराली को खेत में ही प्रबंधित कर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी दिशा में किसानों को जागरूक करने के लिए प्रशासन और कृषि विभाग प्रयास कर रहे हैं। एसडीएम डॉ. बबीता राठौर ने कहा कि जागरूकता और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नरवाई जलाने की समस्या को कम किया जा सकता है।

पराली बनेगी खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ाने का साधन

एसडीएम डॉ. बबीता राठौर ने कहा कि मध्य प्रदेश शासन पर्यावरण संरक्षण और पराली प्रबंधन को लेकर प्रयास कर रहा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और कृषि यंत्रों की जानकारी स्थानीय किसानों तक भी पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल क्षेत्र में पराली प्रबंधन के लिए जरूरी मशीनरी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद किसानों को फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग के लिए जागरूक करना जरूरी है। पराली को जलाने के बजाय खाद बनाने और खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती को भी फायदा मिल सकता है।

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सुपर SMS कृषि यंत्र के लिए 29 अक्टूबर तक आवेदन

वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सुनील कुमार बर्डे ने बताया कि स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) कृषि यंत्र के लिए ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर 21 से 29 अक्टूबर 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं। इस योजना के लिए ऐसे किसान आवेदन कर सकेंगे, जिनके पास अपना ट्रैक्टर उपलब्ध है। प्राप्त आवेदनों के आधार पर 30 अक्टूबर को लॉटरी निकाली जाएगी। आवेदन के साथ संबंधित जिले के सहायक कृषि यंत्री के नाम स्वयं के बैंक खाते से निर्धारित 3,500 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (DD) जमा करना अनिवार्य है। निर्धारित धरोहर राशि जमा किए बिना आवेदन मान्य नहीं होगा। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर योजना की पात्रता, अनुदान और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर देख लें।

क्या है स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम?

स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम को सुपर SMS भी कहा जाता है। यह कंबाइन हार्वेस्टर के साथ इस्तेमाल होने वाला कृषि यंत्र है। इसका काम फसल कटाई के बाद खेत में बची पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पूरे खेत में समान रूप से फैलाना है। इससे फसल अवशेषों को जलाने की जरूरत कम होती है और उनका खेत में ही प्रबंधन किया जा सकता है। पराली धीरे-धीरे मिट्टी में मिलकर जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद कर सकती है।

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पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान

धान और गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में फसल अवशेष बच जाते हैं। कई किसान अगली फसल की बुवाई के लिए खेत खाली करने के उद्देश्य से नरवाई में आग लगा देते हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। साथ ही मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लगातार नरवाई जलाने से मिट्टी की सेहत प्रभावित होती है।

हैप्पी सीडर और सुपर सीडर से भी कर सकते हैं पराली प्रबंधन

स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के अलावा किसान हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग भी कर सकते हैं। इनकी मदद से फसल अवशेषों के बीच अगली फसल की बुवाई संभव होती है। पराली का खेत में ही प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने, नमी बनाए रखने और खेत की तैयारी में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिल सकती है। कृषि विभाग और प्रशासन का जोर है कि किसान नरवाई जलाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ मिट्टी की सेहत सुधारने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...

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