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Sydney coffee cup recycle road का प्रयोग सफल रहा, कप और बायो-बाइंडर से बना टिकाऊ डामर, मजबूत हुई सड़क

ट्रायल में रीसाइकल किए गए कॉफी-कप फाइबर और बायो-बाइंडर वाले स्टोन मैस्टिक डामर का इस्तेमाल किया गया, जिसे लगभग 295 वर्ग मीटर इलाके में 35mm की मोटाई में बिछाया गया। केम्प्स क्रीक में 75 दिन में 15,600 भारी वाहनों के सड़क पर गुजरने से मजबूती पता चली।
Sydney coffee cup recycle road का प्रयोग सफल रहा, कप और बायो-बाइंडर से बना टिकाऊ डामर, मजबूत हुई सड़क
सिडनी में कचरे से बनी सड़क का सफल ट्रायल।

सिडनी। सिडनी में सड़क बनाने के एक ट्रायल में कचरे और रिन्यूएबल मटीरियल से काम करने लायक डामर (asphalt) की सतह बनाई गई है। फरवरी 2024 में, कर्मचारियों ने केम्प्स क्रीक में सिडनी वॉटर के अपर साउथ क्रीक एडवांस्ड वॉटर रीसाइक्लिंग सेंटर  में एक अस्थायी सड़क का हिस्सा बनाया। इसे इस्तेमाल किए जा चुके कॉफी कप से निकाले गए सेल्युलोज फाइबर और पेट्रोलियम-फ्री बायो-बाइंडर का इस्तेमाल करके बनाया गया था। सिडनी वॉटर के अनुसार इस ट्रायल में यह जांचा गया कि क्या कचरे से बने और रिन्यूएबल मटीरियल निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले भारी वाहनों के ट्रैफिक को झेल सकते हैं। 75 दिनों से ज्यादा समय में, ट्रायल वाले इलाके में 15,600 से ज्यादा भारी वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई। बाद में कंपनी ने बताया कि एक्सपेरिमेंटल डामर ज्यादा टिकाऊ लग रहा था। इससे सड़क की सतह को आम सतह की तुलना में पतला बनाया जा सका।

डामर का पर्यावरण पर पड़ने वाला असर कम करने की कोशिश

सड़क बनाने वाले पारंपरिक डामर से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करने के तरीके ढूंढ रहे हैं। इसलिए सिडनी प्रोजेक्ट में यह जांचा गया कि क्या कचरे से निकले फाइबर और रिन्यूएबल मटीरियल भारी ट्रैफिक वाली सड़कों पर काम कर सकते हैं।  डिस्पोजेबल कॉफी कप को रीसाइकल करना मुश्किल होता है। हालांकि ये ज्यादातर कागज से बने होते हैं, लेकिन कई कप में प्लास्टिक की पतली परत होती है, जिससे पारंपरिक रीसाइकिलिंग मुश्किल हो जाती है। रिसर्च से पता चलता है कि इस फाइबर-युक्त मटीरियल को दोबारा हासिल करके डामर के मिश्रण में इस्तेमाल किया जा सकता है। कंस्ट्रक्शन एंड बिल्डिंग मटीरियल्स में छपी एक स्टडी में स्टोन मैस्टिक डामर में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक सेल्युलोज फाइबर के विकल्प के तौर पर कटे-फटे कॉफी कप की जांच की गई। रिसर्चर्स ने पाया कि कम मात्रा में इस्तेमाल करने पर भी यह बाइंडर के बहने (binder drain-down) को कम कर सकता है । यह कमर्शियल सेलुलोज फाइबर जैसी ही परफॉर्मेंस दे सकता है।

नहीं करना होगा लैंड फिल

सिडनी प्रोजेक्ट में उस कप का इस्तेमाल किया गया, जो बेकार कॉफी कप से बना सेलुलोज-फाइबर प्रोडक्ट है। सिडनी वॉटर का यह भी कहना है कि ट्रायल के दौरान इस्तेमाल किए गए हर टन डामर (asphalt) में लगभग 364 कॉफी कप के बराबर मटीरियल था। अगर यह प्रोसेस पक्की अंदरूनी सड़कों के प्रोजेक्ट का हिस्सा बन जाता है तो संस्था को उम्मीद है कि लैंडफिल में भेजे जाने वाले कप बचाए जा सकेंगे।

पतली सड़क भी भारी ट्रैफिक झेलती है

ट्रायल में रीसाइकल किए गए कॉफी-कप फाइबर और बायो-बाइंडर वाले स्टोन मैस्टिक डामर (SMA) का इस्तेमाल किया गया, जिसे लगभग 295 वर्ग मीटर इलाके में 35mm की मोटाई में बिछाया गया। इसकी तुलना पारंपरिक पेवमेंट कंस्ट्रक्शन से की गई, जिसमें लगभग 45mm डामर का इस्तेमाल हुआ। यह सिर्फ मटीरियल के इस्तेमाल में बचत का मामला नहीं था। सिडनी वॉटर के टेस्ट से पता चला कि रीसाइकल किए गए फाइबर और बायो-बाइंडर के मिश्रण से ज्यादा टिकाऊ पेवमेंट बनाया जा सकता है, जिससे पतली परत का इस्तेमाल मुमकिन हो जाता है। ट्रायल पेवमेंट और कंट्रोल पेवमेंट, दोनों में 25 टन मटीरियल का इस्तेमाल किया गया।

ट्रैफिक ने असल दुनिया का टेस्ट किया

75 दिन के ट्रायल के दौरान पेवमेंट पर 15,600 से ज्यादा भारी गाड़ियों की आवाजाही हुई। प्रोजेक्ट ने शुरू में यह आंकड़ा 14,600 से ज़्यादा बताया था, जिसे बाद में बदलकर 15,600 से ज्यादा कर दिया गया। प्रोजेक्ट ने बताया कि SMA की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में 25% और घने-ग्रेड वाले डामर (dense-graded asphalt) की तुलना में 14% की कमी आई। यह अंतर मटीरियल, पेवमेंट की मोटाई और हर तुलना के लिए इस्तेमाल किए गए बेसलाइन के बारे में प्रोजेक्ट के आकलन को दिखाता है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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