बेहद दुर्लभ Apple-1 कंप्यूटर 1.15 मिलियन डॉलर में बिका, नीलामी में बना नया वर्ल्ड रिकॉर्ड

न्यूयॉर्क। एक बेहद दुर्लभ और पूरी तरह से काम करने वाला एप्पल-1 कंप्यूटर नीलामी में 1.15 मिलियन डॉलर (करीब 10 करोड़ 92 लाख रुपये) की रिकॉर्ड कीमत पर बिका है। एप्पल के इस पहले मॉडल के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी नीलामी राशि है, जिसने एक नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। दो कलेक्टर्स के बीच करीब 28 मिनट तक चली बोली के बाद इस ऐतिहासिक सौदे पर मुहर लगी। खास बात यह है कि यह नीलामी एप्पल की 50वीं वर्षगांठ के साल में हुई है। अंतरराष्ट्रीय नीलामी घर बोनहैम्स के डायरेक्टर इयान एहलिंग ने इस बिक्री पर कहा, "हैटफील्ड एप्पल-1 (Apple का बनाया हुआ एक बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण Apple-1 पर्सनल कंप्यूटर है) के लिए मिले इस शानदार परिणाम से हम बेहद खुश हैं। यह कंप्यूटिंग के इतिहास के सबसे अहम पड़ावों में से एक है। कंपनी की 50वीं वर्षगांठ के वर्ष में एप्पल के पहले प्रोडक्ट को प्रस्तुत करना हमारे लिए गर्व की बात है।
एप्पल-1 क्यों है इतना खास
एप्पल-1 रजिस्ट्री में इसे 48वें नंबर पर दर्ज किया गया है। यह उन 75 से भी कम प्रमाणित यूनिट्स में से एक है, जिनके वर्तमान में मौजूद होने की पुष्टि है। अन्य बचे हुए एप्पल-1 मॉडल्स की तुलना में यह यूनिट अपनी बेहतरीन कंडीशन और शानदार दस्तावेजों के कारण अलग पहचान रखती है। इसका मदरबोर्ड पूरी तरह से कार्यशील स्थिति में है और इस पर एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव वोजनियाक के स्पष्ट हस्ताक्षर मौजूद हैं। उन्होंने 1976 में इस हार्डवेयर को डिजाइन किया था और स्वयं अपने हाथों से इसे तैयार किया था। इस लॉट में स्टीव जॉब्स द्वारा लिखा गया एक मूल पत्र भी शामिल था, जिस पर 1978 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह पत्र कंप्यूटर के पहले मालिक फ्रेड हैटफील्ड को लिखा गया था, जिसमें उन्हें उस समय के नए एप्पल II मॉडल के लिए ट्रेड-इन अपग्रेड का ऑफर दिया गया था।इस पैकेज में एक ओरिजिनल ऑपरेशन मैनुअल और एप्पल I ओनर्स क्लब में शामिल होने के लिए टाइप किया गया एक निमंत्रण पत्र भी मौजूद था।
अब दुनिया की सबसे वैल्युएबल कंपनियों में से एक
कंप्यूटर के मदरबोर्ड के साथ कई ओरिजिनल हार्डवेयर कंपोनेंट्स भी मौजूद थे। लाखों डॉलर में हुई यह नीलामी याद दिलाती है कि एप्पल की शुरुआत कितनी साधारण रही थी। हाल ही में यह टेक कंपनी 5 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट वैल्यूएशन के साथ एनवीडिया की श्रेणी में शामिल हो गई है। इसकी बड़ी वजह दुनियाभर में इसके फ्लैगशिप आईफोन की लगातार बनी हुई मजबूत मांग है। एप्पल की कहानी 1970 के दशक की शुरुआत में शुरू हुई, जब जॉब्स और वोजनियाक की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई। दोनों कैलिफोर्निया के पालो ऑल्टो में होमब्रू कंप्यूटर क्लब की मीटिंग्स में नियमित तौर पर शामिल होते थे। वहां कंप्यूटर के शौकीन लोग होम कंप्यूटिंग के उस नए और अनजान कॉन्सेप्ट पर चर्चा करते थे, जो उस वक्त धीरे-धीरे उभर रहा था।
जॉब्स ने बेच दी थी अपनी गाड़ी
शुरुआती प्रोडक्शन के लिए फंड जुटाने के लिए जॉब्स ने अपनी वोक्सवैगन वैन बेच दी। इससे उन्हें जॉब्स के माता-पिता के गैरेज में शुरुआती सर्किट बोर्ड्स तैयार करने में मदद मिली।उनके लिए बड़ा ब्रेक तब आया जब माउंटेन व्यू में स्थित दुनिया के शुरुआती पर्सनल कंप्यूटर रिटेलर्स में से एक बाइट शॉप ने गैरेज में रखे वर्किंग प्रोटोटाइप को देखा और 50 यूनिट का ऑर्डर दे दिया, जिसकी कीमत 500 डॉलर प्रति यूनिट तय की गई थी।
टेक इतिहास का एक निर्णायक मोड़
अपने संस्मरण 'iWoz' में एप्पल-1 के निर्माण की कहानी साझा करते हुए वोजनियाक ने उस ऐतिहासिक पल का जिक्र किया जब रविवार, 29 जून 1975 को इस डिवाइस का आर्किटेक्चर पहली बार हकीकत बना, उन्होंने लिखा- मैंने कीबोर्ड पर कुछ कीज दबाईं और मैं हैरान रह गया! उस वक्त मुझे इसका अहसास नहीं हुआ था, लेकिन वह दिन - रविवार, 29 जून 1975 - एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ था। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी ने कीबोर्ड पर कोई अक्षर टाइप किया और उसे ठीक अपने सामने स्क्रीन पर उभरते हुए देखा।




















