कांग्रेस सरकार के मंत्री कराड़ा के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने बदला नहर का नक्शा! हाईकोर्ट पहुंचा मामला, 4 नवंबर को सुनवाई

जबलपुर। सिवनी जिले के पाटन-कनेरा क्षेत्र में लघु सिंचाई परियोजना के नाम पर एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल और रसूख के इस्तेमाल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि कमलनाथ सरकार के सिंचाई मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा के एक रिश्तेदार गणपत सिंह को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के लिए सरकार के स्वीकृत पुराने प्रोजेक्ट का नक्शा रातों-रात बदल दिया गया। इस बदलाव से जहां एक ओर सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ गया, वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के दर्जनों गरीब किसान अपनी उपजाऊ जमीन गंवाने की कगार पर पहुंच गए हैं। मामले को संजीदगी से लेते हुए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने अंतिम सुनवाई की तिथि 4 नवम्बर को तय की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि मामला एक महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़ा है, इसलिए अब सुनवाई नहीं बढ़ाई जाएगी।
आरोप-सिर्फ एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने की कोशिश
यह याचिका सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के ग्राम पाटन में रहने वाले किसान ऋषि पाराशर की ओर से दाखिल की गई है। आवेदक का आरोप है कि पाटन के कनेरा में कृषि उद्देश्यों के लिए लघु सिंचाई टैंक निर्माण का प्रस्ताव काफी पहले स्वीकृत हुआ था। उसकी लागत शुरु में 9.30 करोड़ रुपए थी। बाद में मंत्री के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने मंत्री के सचिव ने मुख्य अभियंता को पत्र लिखा और पुराने स्वीकृत प्रोजेक्ट को बदलकर 20 करोड़ रुपए का नया प्लान तैयार कर दिया गया। इसके अलावा प्रभावित किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे को जोड़ दिया जाए तो यह राशि अरबों रुपए तक जा सकती है, ताकि केवल एक व्यक्ति (गणपत सिंह गुर्जर) और उसके परिवार को फायदा पहुंचाया जा सके।
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सिंगल बेंच ने मामला डीबी को भेजा
वर्ष 2019 में दाखिल इस याचिका की सुनवाई सिंगल बेंच में हो रही थी। 19 नवम्बर 2024 को जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा था कि इस मामले में याचिकाकर्ता का कोई निजी हित नहीं है। चूंकि मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है, इसलिए इसको डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए।
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