राज्योत्सव की तैयारियों के बीच पटवारी-प्रशासन आमने-सामने, तूता से हटाए गए प्रदर्शनकारी, अब हनुमान मंदिर के पास धरना

रायपुर: छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव की तैयारियों के बीच पटवारियों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। राज्योत्सव स्थल तूता के सामने धरना दे रहे पटवारियों को आयोजन की तैयारियों के चलते वहां से हटा दिया गया है। हालांकि, प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद भी पटवारियों ने आंदोलन खत्म नहीं किया और अब रिंग रोड स्थित नलघर के पास हनुमान मंदिर के सामने धरना जारी रखा है। दूसरी ओर, लगातार कामकाज प्रभावित होने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 28 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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तूता से हटे, लेकिन आंदोलन से पीछे नहीं हटे पटवारी
राज्योत्सव आयोजन की तैयारियों के बीच तूता में धरना दे रहे पटवारियों को प्रदर्शन स्थल खाली करना पड़ा। प्रशासन की ओर से जगह बदलवाए जाने के बाद आंदोलनकारी पटवारी रिंग रोड नलघर के पास हनुमान मंदिर के सामने पहुंच गए। यहां वे अपनी मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
हड़ताल से राजस्व के कामकाज पर असर
पटवारियों के लगातार आंदोलन और कामकाज से दूरी बनाने के कारण राजस्व विभाग से जुड़े शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जमीन संबंधी मामलों, राजस्व अभिलेखों और आम नागरिकों से जुड़े जरूरी कार्यों में परेशानी की स्थिति बन रही है। इससे आम लोगों को भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
प्रशासन की सख्ती, 28 पटवारियों को नोटिस
आंदोलन के बीच प्रशासन ने अब कार्रवाई का रुख अपनाया है। अभनपुर तहसील कार्यालय से 2 नवंबर को जारी कारण बताओ नोटिस में संबंधित 28 पटवारियों की अनुपस्थिति को शासकीय कार्य प्रभावित होने का आधार बताया गया है। नोटिस में कहा गया है कि उनके काम पर उपस्थित नहीं रहने से आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
दो दिन में लिखित जवाब देने का आदेश
तहसीलदार अभनपुर की ओर से जारी नोटिस में संबंधित पटवारियों को दो दिनों के भीतर स्वयं उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने अनुपस्थिति को लेकर जवाब मांगा है। अब देखना होगा कि संबंधित पटवारी नोटिस का क्या जवाब देते हैं और प्रशासन आगे किस तरह की कार्रवाई करता है।
मांगों पर अड़े पटवारी, आगे क्या होगा?
एक ओर पटवारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन ने शासकीय कामकाज प्रभावित होने का हवाला देकर सख्ती शुरू कर दी है। राज्योत्सव के चलते धरना स्थल जरूर बदल गया है, लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। फिलहाल पटवारी-प्रशासन के बीच बढ़ते टकराव के बीच सबसे बड़ी चुनौती राजस्व व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और आम नागरिकों के लंबित कार्यों को पूरा करने की है।




















