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CG NEWS: रविशंकर महाराज को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI जांच मामले में हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई का रास्ता साफ

सुप्रीम कोर्ट ने SLP का किया निपटारा, कहा- हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन CBI जांच से जुड़े मामले में रविशंकर महाराज को सुप्रीम कोर्ट से सीमित लेकिन महत्वपूर्ण राहत मिली है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जायमाल्य बागची की डिवीजन बेंच ने उनकी विशेष अनुमति याचिका SLPका निपटारा करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन देने की स्वतंत्रता प्रदान की।
रविशंकर महाराज को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI जांच मामले में हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई का रास्ता साफ

RAIPUR BILASPUR NEWS। CBI जांच से जुड़े बहुचर्चित मामले में रविशंकर महाराज को सुप्रीम कोर्ट से अहम राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और स्पष्ट किया कि सभी कानूनी प्रश्नों पर फैसला हाईकोर्ट ही करेगा।

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सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

CBI जांच से जुड़े मामले में रविशंकर महाराज को सुप्रीम कोर्ट से सीमित लेकिन महत्वपूर्ण राहत मिली है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जायमाल्य बागची की डिवीजन बेंच ने उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन देने की स्वतंत्रता प्रदान की।

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क्या है पूरा मामला?

मामला दूरसंचार संदेशों (Telecommunication Messages) के वैध इंटरसेप्शन से जुड़े आदेश की वैधता पर आधारित है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में इंटरसेप्शन आदेश की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

नियम 3(3)(बी) बना विवाद की जड़

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि Telecommunications (Procedures and Safeguards for Lawful Interception of Messages) Rules, 2024 के नियम 3(3)(बी) के तहत किसी भी इंटरसेप्शन आदेश को सात कार्य दिवस के भीतर समीक्षा समिति के समक्ष पुष्टि के लिए रखा जाना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो आदेश स्वतः प्रभावहीन हो जाता है और उसके आधार पर एकत्र किए गए साक्ष्यों की वैधता भी समाप्त हो सकती है।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पाया कि यह महत्वपूर्ण कानूनी आधार मूल याचिका में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं था। अदालत ने याचिकाकर्ता को नया शपथपत्र दाखिल कर अपने तर्क विस्तार से रखने के निर्देश दिए। साथ ही CBI को भी सक्षम अधिकारी के शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया।

14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

यह मामला पहले 24 जून को सूचीबद्ध था। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 निर्धारित की है, जहां इंटरसेप्शन प्रक्रिया की वैधता से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों पर विस्तार से बहस होगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या राहत दी?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने केवल इतना कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। अब यह तय करना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में होगा कि मामले की सुनवाई कब और किस प्राथमिकता से की जाएगी।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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