CG NEWS:OBC सर्वे में बड़ी गड़बड़ी! आय, संपत्ति और सरकारी योजनाओं का डेटा निकला गलत, आयोग ने जताई नाराजगी

PREM KUMAR RAIPUR। छत्तीसगढ़ में चल रहे ओबीसी सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किए गए आंकड़ों में आय, संपत्ति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं और पारिवारिक विवरण से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियां मिलने के बाद छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है। आयोग के निर्देश पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को तत्काल त्रुटियों में सुधार कर वास्तविक तथ्यों के आधार पर दोबारा डेटा एंट्री करने के निर्देश जारी किए हैं।
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आयोग की जांच में खुली पोल
ओबीसी सर्वे के परीक्षण के दौरान आयोग ने पाया कि कई परिवारों की मूलभूत जानकारी ही गलत दर्ज की गई है। परिवार प्रमुख की उम्र, पति-पत्नी की आयु, विवाह की उम्र और पारिवारिक विवरण में गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं। कई स्थानों पर परिवार के सभी सदस्यों को अशिक्षित दर्शाया गया, जबकि अन्य विवरण इस जानकारी से मेल नहीं खाते।
आय और रोजगार का डेटा भी संदिग्ध
सर्वे में बड़ी संख्या में परिवारों की वार्षिक आय शून्य या एक जैसी दर्ज कर दी गई। कई परिवारों के सभी सदस्यों को बेरोजगार बताया गया, जबकि रोजगार संबंधी कॉलम खाली छोड़ दिए गए। आयोग ने आशंका जताई है कि कई जगह वास्तविक सर्वेक्षण करने के बजाय अनुमान के आधार पर जानकारी भर दी गई।
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मकान है, लेकिन संपत्ति नहीं!
जांच में यह भी सामने आया कि कई परिवारों के पास स्वयं का मकान दर्ज है, लेकिन अचल संपत्ति वाले कॉलम में 'नहीं' लिखा गया है। वाहन, चल संपत्ति और अन्य संसाधनों की जानकारी भी कई मामलों में एक-दूसरे से विरोधाभासी पाई गई।
सरकारी योजनाओं का लाभ भी गायब
आयोग ने पाया कि अनेक परिवार राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर इन योजनाओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया। जाति प्रमाण-पत्र और आरक्षण से जुड़े कॉलम भी कई जगह अधूरे या गलत पाए गए।
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पाली नगर पंचायत बना मिसाल
कोरबा जिले की नगर पंचायत पाली का एक मामला आयोग ने उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। यहां 55 वर्षीय महिला परिवार प्रमुख के पति की उम्र मात्र 21 वर्ष दर्ज कर दी गई। परिवार के सभी पांच सदस्यों को अशिक्षित और बेरोजगार बताया गया, जबकि अन्य जानकारी इससे मेल नहीं खाती। परिवार की वार्षिक आय शून्य और संपत्ति संबंधी जानकारी भी पूरी तरह विरोधाभासी मिली।
सभी निकायों को सुधार के निर्देश
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को 54 बिंदुओं वाले सर्वे प्रपत्र के अनुसार वास्तविक जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी परिवार की जानकारी अधूरी हो तो संबंधित परिवार से संपर्क कर तथ्यात्मक जानकारी जुटाने के बाद ही पोर्टल पर प्रविष्टि करने को कहा गया है।
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गलत डेटा से प्रभावित होंगी भविष्य की योजनाएं
अधिकारियों का मानना है कि यदि सर्वेक्षण के आंकड़े गलत रहे तो पिछड़ा वर्ग के लिए बनने वाली सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक योजनाओं की दिशा प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से आयोग ने डेटा की गुणवत्ता सुधारने और सभी त्रुटियों को तत्काल दूर करने पर विशेष जोर दिया है।












