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प्राकृतिक खेती में राजस्थान बना मिसाल,क्लस्टर गठन में दूसरा, कृषक पंजीकरण में तीसरा स्थान

यह मिशन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणन और विपणन की समग्र सुविधा भी उपलब्ध कराता है। इसके तहत देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय, 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान तथा 18 उत्कृष्टता केंद्र मिशन अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
क्लस्टर गठन में दूसरा, कृषक पंजीकरण में तीसरा स्थान
राजस्थान राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत राज्य में अब तक दो हजार 380 क्लस्टर गठित कर देश में दूसरे स्थान पर हैं जबकि कृषक पंजीकरण में तीसरा स्थान प्राप्त किया हैं।

जयपुर। राजस्थान राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत राज्य में अब तक दो हजार 380 क्लस्टर गठित कर देश में दूसरे स्थान पर हैं जबकि कृषक पंजीकरण में तीसरा स्थान प्राप्त किया हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार ढाई लाख किसानों को जोड़कर एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनाये रखते हुए टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा सके। 

2380 क्लस्टर गठित हुए

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत राज्य में अब तक दो हजार 380 क्लस्टर गठित किये जा चुके हैं, जो आंध्र प्रदेश के बाद देशभर में सर्वाधिक है। इन क्लस्टरों से प्रदेश के दो लाख 12 हजार 346 किसान जुड़े हैं, यह संख्या आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाद देश में सबसे अधिक है। साथ ही, अब तक राज्य के लगभग 91 हजार 166 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनायी जा चुकी है, जो राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करती है। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 तक लगभग 49 करोड़ 97 लाख रुपये का व्यय किया गया है। श्री शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को नयी दिशा देने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है। 

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खेती करने वाले किसानों को मिलेंगे 30 हजार

प्रदेश में 50 हजार किसानों को गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के माध्यम से जैविक खाद उत्पादन के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। जोधपुर, कोटा और उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट स्थापित किये जा रहे हैं, जिससे किसानों को जैविक उत्पादों का बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा। राज्य सरकार पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है। गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए दो हजार 856 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य की गोशालाओं को दिया गया है। बजट 2025-26 में कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नैचुरल फार्मिंग की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा। 

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25 नवंबर 2024 को प्रारम्भ हुआ था राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 25 नवंबर 2024 को प्रारम्भ किया गया, जिसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा किसानों की आय बढ़ाना है। यह मिशन केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रमाणन और विपणन की समग्र सुविधा भी उपलब्ध कराता है। इसके तहत देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय, 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान तथा 18 उत्कृष्टता केंद्र मिशन अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष चार हजार रुपये की प्रोत्साहन सहायता राशि दो वर्षों तक उपलब्ध करवाई जा रही है। नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91 प्रतिशत किसानों के उत्पादन में वृद्धि हुई तथा लगभग 90 प्रतिशत किसानों की उत्पादन लागत में कमी आयी है। साथ ही, मिट्टी के स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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