रायपुर में कांग्रेस नेता कुकरेजा से 25 करोड़ रंगदारी मामले में शोएब ढेबर की तलाश तेज,पुलिस की दबिश से पहले फरार

प्रेम कुमार, रायपुर: राजधानी में रायपुर में कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी शोएब ढेबर की तलाश तेज हो गई है। पुलिस ने बुधवार को उसके पाम बेलाजिओ स्थित ठिकाने, बैरन बाजार के पारिवारिक आवास समेत करीब आधा दर्जन संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही शोएब वहां से निकल चुका था। अब दूसरे राज्य में उसके जाने की आशंका के बीच पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों और संपर्कों को खंगाल रही हैं। इसी बीच छापे की सूचना लीक होने की आशंका को लेकर पुलिस के दो आरक्षकों पर भी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
छापे से पहले निकल गया शोएब, खाली हाथ लौटी पुलिस
रायपुर पुलिस ने शोएब ढेबर की तलाश में उसके संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। पाम बेलाजिओ और बैरन बाजार स्थित ठिकानों समेत करीब छह स्थानों पर पुलिस टीम पहुंची, लेकिन कार्रवाई शुरू होने से पहले ही शोएब वहां से निकल चुका था। पुलिस अब उसकी संभावित लोकेशन और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
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दूसरे राज्य में छिपे होने की भी आशंका
पुलिस को आशंका है कि शोएब कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद रायपुर से बाहर निकल गया। इसी आधार पर जांच का दायरा दूसरे राज्यों तक बढ़ाया गया है। पुलिस की टीमें उसके संभावित ठिकानों के साथ रिश्तेदारों और संपर्कों से जुड़े स्थानों पर भी नजर रख रही हैं।
‘रेड लीक’ की जांच, पुलिसकर्मी भी जांच के घेरे में
शोएब के पुलिस कार्रवाई से पहले फरार होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसे दबिश की जानकारी कैसे मिली। इसी कड़ी में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट में पदस्थ आरक्षक शिवम द्विवेदी को रक्षित केंद्र से संबद्ध किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं तेलीबांधा थाने में पदस्थ आरक्षक अजीत कुमार गुप्ता को भी रक्षित केंद्र से संबद्ध किए जाने की रिपोर्ट है।
पुलिस विभाग के अंदर से सूचना बाहर गई?
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या पुलिस की दबिश से जुड़ी गोपनीय जानकारी कार्रवाई से पहले ही आरोपी तक पहुंची थी। यदि ऐसा हुआ, तो सूचना किस स्तर से बाहर गई और शोएब तक कैसे पहुंची, इसकी जांच की जा रही है। हालांकि पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आधिकारिक कारणों को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण हैं।
कोर्ट से मिली थी दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति
25 करोड़ की रंगदारी मामले में शोएब ढेबर को पहले पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। बाद में उसे जमानत मिल गई थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी दोबारा गिरफ्तारी के लिए कोर्ट का रुख किया और अनुमति मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई। इसी बीच पुलिस की कार्रवाई से पहले उसके फरार होने की बात सामने आई।
विदेशी नंबर से आया था धमकी भरा मैसेज
मामला 14 सितंबर को सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को विदेशी नंबर से WhatsApp के जरिए धमकी दी गई थी। आरोप है कि धमकी देने वाले ने गैंग के नाम का इस्तेमाल करते हुए 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी और रकम नहीं देने पर कुकरेजा तथा उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।
जांच में कैसे सामने आया शोएब का नाम?
पुलिस की शुरुआती जांच में जांजगीर-चांपा के एक युवक की भूमिका सामने आई थी। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर शोएब ढेबर का नाम जांच में आया। पुलिस ने इसके बाद शोएब को हिरासत में लेकर पूछताछ की और मामले में उसकी कथित भूमिका की जांच शुरू की।
धमकी के लिए गैंग के नाम के इस्तेमाल की जांच
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि धमकी देने की कथित साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे और गैंग का नाम किस स्तर पर इस्तेमाल किया गया। मोबाइल, सिम कार्ड, नंबर और डिजिटल संपर्कों से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
50 करोड़ वाले मामले से भी जोड़ी जा रही कड़ी
इस मामले की जांच के दौरान पूर्व महापौर एजाज ढेबर से कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का पुराना मामला भी सामने आया। उस मामले में भी लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग के नाम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस दोनों मामलों के बीच किसी संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।
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अब पुलिस के सामने दो बड़ी चुनौती
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शोएब ढेबर को तलाशना और उसकी कथित भूमिका से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना है। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दबिश की जानकारी पहले ही बाहर कैसे पहुंची। शोएब की गिरफ्तारी के बाद ही पूछताछ से मामले की आगे की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।




















