Naresh Bhagoria
26 Jan 2026
बरेली। 77वें गणतंत्र दिवस के दिन जब देशभर में राष्ट्रीय पर्व की खुशियां मनाई जा रही थीं, उसी दिन बरेली से एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया। यह इस्तीफा प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी घटना के विरोध में दिया गया, जिसने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया।

अलंकार अग्निहोत्री ने अपना सात पन्नों का इस्तीफा राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजा है। उन्होंने यूजीसी बिल पर भी विरोध जताया है। अपने इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने स्वयं को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा वर्ष 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताया है और अपनी शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से होने का उल्लेख किया है। उन्होंने सीधे राज्यपाल को संबोधित करते हुए लिखा है कि “प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की।”
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उन्होंने पत्र में लिखा कि “वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया,” और चोटी/शिखा को ब्राह्मणों और साधु-संतों का धार्मिक प्रतीक बताया गया है। उन्होंने यह भी लिखा है कि प्रयागराज की घटना से स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों के अपमान की पुष्टि होती है और यह एक गंभीर एवं चिंताजनक विषय है।
इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े नजर आ रहे हैं। पोस्टर पर लिखा है— “#UGC_ROLL BACK, काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”