Naresh Bhagoria
26 Jan 2026
मुजफ्फरपुर। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागरिक कर्तव्यों, संविधान और भारतीय मूल्यों की अहम भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। मुजफ्फरपुर स्थित आरएसएस कार्यालय ‘मधुकर निकेतन’ में ध्वजारोहण के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया का अग्रणी गणराज्य बनाने के लिए हर नागरिक को अपने संविधान में मौलिक कर्तव्यों का पूरे मन से पालन करना बहुत आवश्यक है।
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को धर्म, नैतिकता और सामाजिक मर्यादाओं की स्पष्ट दिशा भी देता है। उन्होंने संविधान के नियमित अध्ययन को आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों को भी सही ढंग से समझ पाते हैं।
डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि नियम और कानून के सम्मान के बिना किसी भी गणराज्य की स्थिरता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक स्वयं अनुशासित रहते हैं, तभी शासन व्यवस्था प्रभावी होती है। गणतंत्र केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों के आचरण से मजबूत होता है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी परंपराओं में नियमों को विशेष महत्व दिया गया है। ये नियम समाज के हर वर्ग को जोड़ने, संतुलन बनाए रखने और मानवीय मूल्यों की रक्षा करने में सहायक हैं। भागवत के अनुसार, भारतीय परंपराएं व्यवहारिक हैं और समाज को एक सूत्र में बांधने का काम करती हैं।
देश की स्वतंत्रता के लिए हुए लंबे और कठिन संघर्ष को याद करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अपार बलिदान देकर यह गणराज्य हमें सौंपा है। इसे सुरक्षित और सशक्त बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।
राष्ट्रीय ध्वज के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि तिरंगे का केसरिया रंग त्याग और निरंतर गतिशीलता का प्रतीक है। सफेद रंग विचारों की शुद्धता और सत्य का संकेत देता है, जबकि हरा रंग प्रगति, समृद्धि और आशा को दर्शाता है। ध्वज के मध्य स्थित अशोक चक्र यह संदेश देता है कि हर प्रकार की प्रगति धर्म और नैतिकता के मार्गदर्शन में होनी चाहिए।