PoK में प्रदर्शन के बीच पाकिस्तानी सेना पर ड्रोन से बम बरसाने का आरोप, कई लोगों की मौत

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में 5 नवंबर को प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों पर गोलीबारी तथा ड्रोन से हमले करने के आरोप लगाए। स्थानीय दावों में सात लोगों की मौत और 23 लोगों के गंभीर घायल होने की बात कही गई है। हालांकि, दूसरी मीडिया रिपोर्टों में मृतकों और घायलों की संख्या अलग बताई गई है।
रावलकोट में उमर फारूक चौक और बस टर्मिनल के आसपास तनाव की खबरें सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कथित हमलों में इस्तेमाल हुए हथियारों के अवशेष भी सार्वजनिक रूप से दिखाए।
रावलकोट हिंसा में ड्रोन हमले का आरोप
प्रदर्शन के आयोजकों में शामिल सरदार उमर नजीर ने हथियारों के कुछ पुर्जे दिखाए। उन्होंने उमर फारूक चौक पर इन्हें लोगों के सामने रखा। उनका दावा था कि पाकिस्तानी रेंजर्स और फ्रंटियर कोर (FC) ने ड्रोन से बम गिराए।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इन हमलों में आम नागरिकों के घर भी प्रभावित हुए। उन्होंने घटनास्थल से मिले पुर्जों को कथित हमलों का सबूत बताया। हालांकि, इन पुर्जों की तकनीकी जांच की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सरदार उमर नजीर ने दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों से मामले का संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाए। इन आरोपों पर पाकिस्तानी सेना का आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं है।
बस टर्मिनल पर गोलीबारी के आरोप
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, रावलकोट बस टर्मिनल के पास सुबह से गोलीबारी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि रेंजर्स और FC ने सुबह करीब 8 बजे कार्रवाई शुरू की। इस दौरान गोलीबारी के साथ बमबारी भी की गई।
प्रदर्शनकारियों ने मौके से आरपीजी-7 रॉकेट का टेल फिन (पिछला स्थिर रखने वाला हिस्सा) मिलने का दावा किया। उन्होंने इसे सार्वजनिक रूप से दिखाया। उनका आरोप था कि सुरक्षा बलों ने गोलीबारी के अलावा रॉकेट और ड्रोन का इस्तेमाल किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से हथियारों के इस्तेमाल की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। बरामद पुर्जों की पहचान और उनकी जांच रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है।
प्रदर्शनकारियों ने क्या दावा किया?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने निहत्थे लोगों को निशाना बनाया। उन्होंने नागरिकों के घरों पर ड्रोन से बम गिराने का आरोप लगाया। सरदार उमर नजीर ने कथित हथियारों के अवशेष दिखाकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग की। यह मामला अब केवल स्थानीय विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसमें नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं।
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मौतों और घायलों के आंकड़ों में अंतर
रावलकोट की घटना में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। आपके उपलब्ध सोर्स में सात प्रदर्शनकारियों की मौत और 23 लोगों के गंभीर घायल होने का दावा है, लेकिन 5 नवंबर 2026 को प्रकाशित आजतक की रिपोर्ट में तीन लोगों की मौत और 18 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई।
इस रिपोर्ट में उमर फारूक चौक पर गोलीबारी और ड्रोन हमलों के आरोप भी शामिल हैं। इसलिए सात मौतों और 23 गंभीर घायलों के आंकड़े को अंतिम मानना उचित नहीं होगा। स्थानीय दावों और मीडिया रिपोर्टों के बीच अंतर बना हुआ है। स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी एक संख्या को अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लगाए आरोप
PoK पुलिस ने अपने बयान में प्रदर्शनकारियों पर पहले गोली चलाने का आरोप लगाया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दंगाई बताया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस ने ड्रोन हमलों और आरपीजी-7 के इस्तेमाल के आरोपों पर जवाब नहीं दिया। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। पुलिस का पक्ष और प्रदर्शनकारियों के आरोप घटना की अलग तस्वीर पेश करते हैं। इसलिए पूरी घटना समझने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।
पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारेबाजी
कथित हमलों के बाद प्रदर्शनकारियों ने उमर फारूक चौक पर धरना जारी रखा। उन्होंने पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स, FC और PoK पुलिस के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को लेकर नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि विरोध को दबाने के लिए आम नागरिकों पर हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
पीओके में प्रदर्शन के दौरान सामने आए इन आरोपों ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। रावलकोट प्रदर्शन में सामने आई तस्वीरों और वीडियो को लेकर भी जांच की जरूरत है।
पांच महीने से जारी है PoK में प्रदर्शन
आपके दिए गए सोर्स के अनुसार, PoK में करीब पांच महीने से विरोध प्रदर्शन जारी है। इस आंदोलन के दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच तनाव बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों की मांगों और आंदोलन के कारणों की पूरी जानकारी उपलब्ध सोर्स में नहीं दी गई है। इसलिए आंदोलन के सभी मुद्दों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा।
कश्मीर में हिंसा के इस घटनाक्रम में नागरिकों की सुरक्षा सबसे अहम सवाल है। पाकिस्तानी सेना और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ड्रोन अटैक के आरोपों की जांच जरूरी
प्रदर्शनकारियों ने ड्रोन हमलों और रॉकेट के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उन्होंने कथित हथियारों के अवशेष भी सार्वजनिक किए हैं, लेकिन केवल पुर्जे दिखाने से हमले की पूरी पुष्टि नहीं होती।
इन अवशेषों की तकनीकी जांच से हथियारों की पहचान हो सकती है। घटनास्थल की स्वतंत्र जांच से हमलों की प्रकृति भी स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, पाकिस्तानी सेना का आधिकारिक पक्ष और इन आरोपों पर जांच के नतीजे सामने आना बाकी हैं।




















