पेंटागन CTO का बड़ा खुलासा, ड्रोन युद्ध के लिए तैयार नहीं था अमेरिका, यूक्रेन ने खुद बनाई तकनीक, US के पास 5 लाख ड्रोन

वॉशिंगटन। पेंटागन के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफीसर (CTO) एमिल माइकल ने कहा है कि अमेरिका आधुनिक ड्रोन युद्ध के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी माना कि यूक्रेन को युद्ध के मैदान में अपनी जरूरत की कुछ तकनीकें खुद विकसित करनी पड़ीं, क्योंकि अमेरिका उन्हें उपलब्ध नहीं करा सका। WSJ टेक कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, माइकल ने कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष ने अमेरिका की सैन्य तैयारियों में बड़ी कमियों को उजागर कर दिया है, जिसके बाद देश ने अपनी ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयासों में तेजी ला दी है।
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पेंटागन CTO बोले- हम पूरी तरह से तैयार नहीं थे
कैलिफोर्निया के नापा में आयोजित कॉन्फ्रेंस में माइकल ने कहा कि पेंटागन ने कभी नहीं सोचा था कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन इतने अहम हो जाएंगे। उन्होंने कहा- यूक्रेन और रूस के बीच ड्रोन युद्ध ने हमें पूरी तरह से चौंका दिया। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं था क्योंकि हमने कभी ऐसी कल्पना ही नहीं की थी। उन्होंने बताया कि अब रक्षा विभाग भविष्य के संघर्षों की तैयारी पर ध्यान दे रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आगे चलकर युद्ध का स्वरूप कैसा हो सकता है। माइकल ने माना कि रूस के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को काफी मदद दी, लेकिन यूक्रेनी सेना को अक्सर युद्ध के मैदान में अपनी जरूरत के समाधान खुद ही खोजने पड़े। हमने यूक्रेन की बहुत मदद की, लेकिन उन्हें जिस चीज की असल में जरूरत थी, उसे उन्होंने खुद ही ईजाद कर लिया, क्योंकि हमारे पास वह मौजूद नहीं थी।
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ड्रोन भंडार में बढ़ोतरी, लेकिन यूक्रेन बहुत आगे
माइकल ने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में अमेरिका ने लगभग 1,000 ड्रोन बनाए थे, जबकि अभी उनके पास करीब 500,000 ड्रोन का भंडार है। रूस के साथ युद्ध के पांचवें साल में प्रवेश करते हुए, यूक्रेन का अनुमान है कि वह इस साल 80 लाख से 1 करोड़ (8 से 10 मिलियन) ड्रोन बनाएगा। अमेरिका का मौजूदा भंडार इसके मुकाबले बहुत छोटा है।
पेंटागन भविष्य के युद्धक्षेत्रों का अध्ययन कर रहा
माइकल ने बताया कि रक्षा विभाग के 'प्रोजेक्ट मेरिडियन' को यह जांचने का काम सौंपा गया है कि भविष्य में युद्ध किस तरह के हो सकते हैं, जिसमें जमीन के नीचे और अंतरिक्ष में होने वाले संभावित संघर्ष भी शामिल हैं। इस पहल में स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और एंडुरिल इंडस्ट्रीज के संस्थापक पामर लकी जैसी उद्योग जगत की हस्तियां भी शामिल हैं।
AI टारगेटिंग को लेकर सावधानी
भले ही पेंटागन सस्ते और स्वायत्त (ऑटोनॉमस) सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, लेकिन माइकल ने कहा कि सेना युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर अभी भी काफी सतर्क है। उन्होंने बताया कि लक्ष्यों की पहचान करने के लिए आज भी AI की तुलना में खुफिया रिपोर्टों, सैटेलाइट तस्वीरों और इंसानों द्वारा की गई जांच पर ज़्यादा निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि AI के जरिए लक्ष्य तय करने के मामले में अमेरिका अभी बहुत उन्नत नहीं है। माइकल ने पिछले साल फरवरी में ईरान में हुए उस अमेरिकी हमले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें एक लड़कियों के स्कूल को गलती से सैन्य ठिकाना समझ लिया गया था। इस घटना में दर्जनों बच्चों समेत 100 से ज़्यादा लोग मारे गए थे। अमेरिका ने अपनी जांच के नतीजे अभी तक जारी नहीं किए हैं और इस हमले की योजना बनाने में एक AI टारगेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। माइकल ने कहा कि हर स्तर पर इंसानी समझ और सही निर्णय का होना जरूरी है।




















