BLA चीफ बशीर जेब बलूच के पद छोड़ने के बाद रहस्य गहराया, जहर देने और मौत के दावों पर संगठन ने दी सफाई

नई दिल्ली। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब बलूच के पद छोड़ने की घोषणा के बाद, उनकी स्थिति और वे कहां हैं इसे लेकर रहस्य बना हुआ है। विद्रोही समूह की यह घोषणा पाकिस्तान समर्थक सैन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स पर चल रहे उन दावों से बिल्कुल अलग है, जिनमें उन पर जानलेवा हमले या उनकी मौत की बात कही जा रही है। पाकिस्तान समर्थक टेलीग्राम चैनलों पर अज्ञात सूत्रों का हवाला देते हुए यह अटकलें लगाई गईं कि कंधार में उनके ही किसी करीबी ने उन्हें जहर देने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें तुरंत एक सैन्य अस्पताल ले जाया गया। कुछ अन्य अकाउंट्स ने तो यहां तक दावा किया कि सितंबर में अफगानिस्तान के अंदर पाकिस्तानी सेना के हवाई हमले में उन्हें मार दिया गया था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
जेब BLA के बड़े हमले ऑपरेट कर रहे थे
जेब BLA के बड़े हमले 'ऑपरेशन हेरोफ' के मुख्य चेहरे के रूप में सामने आए थे। इस ऑपरेशन के दौरान जारी कुछ तस्वीरों में उन्हें बिना किसी सुरक्षा घेरे के मोटरसाइकिल चलाते हुए देखा गया था। इसने सुरक्षा और खुफिया हलकों में काफी हलचल मचा दी थी। BLA की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में समूह ने जेब के पद छोड़ने के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए कहा- संगठन के संविधान के अनुसार सीनियर कमांड काउंसिल के फैसले के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी के पूर्व कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब बलूच अब संगठन के प्रमुख के रूप में काम नहीं करेंगे।
सीनियर कमांड काउंसिल को मिली पूरी कमान
BLA के बयान में कहा गया है, "नए कमांडर-इन-चीफ के चुने जाने तक सभी प्रशासनिक, सैन्य और नीति-निर्माण संबंधी शक्तियां आधिकारिक तौर पर 'सीनियर कमांड काउंसिल' को सौंप दी गई हैं। बता दें कि यह BLA की सर्वोच्च संस्था है। वहीं सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। विद्रोही समूह ने बताया कि 2018 में BLA के पुनर्गठन के दौरान, इसके वैचारिक और संरचनात्मक संस्थापक उस्ताद असलम बलूच ने वंशवादी राजनीति और आजीवन नेतृत्व की प्रथा को खत्म कर दिया था। उन्होंने संगठन की नींव योग्यता, पारदर्शिता और संस्थागत सिद्धांतों पर रखी थी। उन्होंने यह सिद्धांत तय किया था कि इस आंदोलन में कोई कमांडर चाहे कितना भी प्रभावशाली, प्रमुख या उच्च पद पर क्यों न हो, कोई भी व्यक्ति जीवन भर के लिए कमांडर-इन-चीफ नहीं बना रह सकता। इस वैचारिक और संगठनात्मक निरंतरता को बनाए रखने के लिए, BLA के संविधान में आम सहमति पर आधारित एक स्पष्ट प्रक्रिया शामिल की गई थी।
ताकि जरूरत पड़ने पर नेतृत्व में बदलाव लाया जा सके
ऐसा इसलिए क्योंकि जरूरत पड़ने पर नेतृत्व के सुचारू बदलाव के लिए एक स्थापित और शांतिपूर्ण संवैधानिक रास्ता मौजूद रहे। बयान में कहा गया- इसी सिद्धांत के अनुसार, 16 अक्टूबर को BLA की सर्वोच्च संस्थाओं की एक संयुक्त बैठक हुई जिसमें संवैधानिक और संगठनात्मक मामलों की गहन समीक्षा की गई। बैठक के दौरान सभी कमांडरों ने सर्वसम्मति से नेतृत्व में बदलाव का फैसला लिया, ताकि संगठन की गतिविधियों को नई गति दी जा सके। BLA ने कहा- सभी मोर्चों पर हमारे अभियान बिना किसी रुकावट के जारी हैं। अगले चरणों के पूरा होने पर जल्द ही नए कमांडर-इन-चीफ के नाम की घोषणा की जाएगी।




















