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पाई-पाई जोड़कर प्लॉट खरीदा, लोन लेकर मकान बनाया.. अब पता चला जमीन सरकारी, सता रहा तोड़े जाने का डर

कोकता बायपास पर जमीन की नाप पूरी, निशान देखकर लोग बोले-
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 पाई-पाई जोड़कर प्लॉट खरीदा, लोन लेकर मकान बनाया.. अब पता चला जमीन सरकारी, सता रहा तोड़े जाने का डर

बृजेंद्र वर्मा 

भोपाल। धीरज चौहान आरटीओ एजेंट हैं। इन्होंने कोकता बायपास अनंतपुरा क्षेत्र में 12 लाख रुपए में 1480 वर्गफीट का एक प्लॉट बिल्डर सिद्धार्थ सिन्हा से खरीदा था। साल 2017 में इसकी रजिस्ट्री हो गई। बैंक से 9 लाख रुपए का लोन भी है। अब इन्हें मकान टूटने का डर सता रहा है। सेवानिवृत सीएसपी मंगल सिंह ठाकरे के मकान की दीवार पर भी सीमांकन में लाल निशान लगाकर मार्किंग कर दी गई है। उनका कहना कि जब ये जमीन सरकारी थी तो रजिस्ट्री कैसे की गई। यह परेशानी है, कोकता बायपास पर मकान बनाने वाले लोगों की। ड्रग मामले में मछली परिवार के अवैध निर्माणों को ढहा दिया गया है। इसके बाद यहां मौजूद पशुपालन जमीन की नपती शुरू हुई। इसमें 50 मकान और प्लॉट सरकारी जमीन पर कब्जे के दायरे में आए हैं।

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सीमांकन का काम पूरा

पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन के सीमांकन का काम पूरा हो चुका है। रिपोर्ट में 65 एकड़ जमीन पर कब्जा पाया गया। इस पर 50 मकान-प्लॉट, 30 दुकानें, पेट्रोल पंप व 1 स्कूल का निर्माण सामने आया है।

मछली परिवार का दखल नहीं

मछली परिवार के एडवोकेट विशेष नामदेव का कहना है कि जिस जमीन का प्रशासन ने सीमांकन किया है, उस जमीन पर मछली परिवार का कोई दखल नहीं है। प्रशासन को पत्र देकर भी जानकारी दी है कि उक्त जमीन पर मछली परिवार के कब्जे नहीं हैं।

इसलिए किया सीमांकन

34 साल बाद पशुपालन विभाग के सीमांकन के पीछे भोपाल के मछली परिवार पर हुई कार्रवाई है। ड्रग्स और रेप केस के मामले में इस परिवार के दो सदस्य जेल में है, जबकि अन्य पर भी कार्रवाई हो रही है। इसके बाद 30 जुलाई व 21 अगस्त को प्रशासन ने दो बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 बड़े अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। ये सभी सरकारी जमीन पर बनाए गए थे, ऐसा सामने आया है। 

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सवाल... प्रशासनिक खाका मजबूत तो कैसे हुए कब्जे

पटवारी: उस समय के पटवारियों की सीधी जिम्मेदारी थी कि कैसे पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जे हो गए? क्योंकि नपती और नामांतरण इन्हीं के हाथ में होता है।

आरआई: जमीन के राजस्व संबंधी काम यही पास करते हैं।

तहसीलदार: जमीन का निरीक्षण करने का काम इन्हीं का होता है।

एसडीएम: टीम का नेतृत्व यही करते है। तहसीलदार इन्हीं को रिपोर्ट देते हैं।

कलेक्टर: एसडीएम कलेक्टर को रिपोर्ट करता है।

टीएंडसीपी : बिल्डरों को कॉलोनी विकसित करने की अनुमति यही एजेंसी देती है।

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रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष रखी जाएगी।

कोकता बायपास अनंतपुरा क्षेत्र में पशुपालन विभाग की जमीन का सीमांकन हो चुका है। इसमें कुछ मकान, प्लॉट, दुकानें, पेट्रोल पंप के कब्जे निकले हैं। विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष रखी जाएगी।

रवीश कुमार, एसडीएम, गोविंदपुरा

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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