Shivani Gupta
7 Jan 2026
पल्लवी वाघेला, भोपाल। आमतौर पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें बच्चों की खातिर माता-पिता ने मतभेद भुलाकर एक होने का फैसला किया। लेकिन भोपाल फैमिली कोर्ट में संभवत: पहला ऐसा मामला पहुंचा है जहां, संतान के कारण ही माता-पिता तलाक तक पहुंच गए। दरअसल, दंपति की बेटी स्पेशल चाइल्ड है और दोनों उसकी इस स्थिति में जन्म का दोष एक-दूसरे पर लगाकर बेटी की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने पर आमादा थे। हालांकि, मामले में दो माह की काउंसलिंग, साथ ही पॉजिटिव केस स्टडी और अन्य स्पेशल चाइल्ड के पैरेंट्स से बातचीत ने जादू का काम किया। दंपति, पूरे समर्पण से बच्ची की परवरिश करने का संकल्प लेकर एक साथ घर लौटे।
दंपति की शादी छह साल पहले हुई थी और यह उनकी पहली संतान है। बच्ची की उम्र करीब साढ़े तीन वर्ष है। बीते लगभग एक साल से बच्ची की मां उसे छोड़कर मायके में रह रही थी। पिता ने तलाक का केस लगाया था। पहली काउंसलिंग में पहुंचे माता-पिता पूरा समय एक दूसरे की कमी निकालते रहे और एक ही रट लगाए रहे कि न तो यह बच्ची उन्हें चाहिए और न एक-दूसरे का साथ। दोनों बच्ची की मानसिक मंदता के लिए एक-दूसरे में कमी बता रहे थे।
काउंसलिंग में पिता का कहना था कि हमारे परिवार में कभी कोई बच्चा ऐसा नहीं हुआ। वहीं मां ने कहा कि बच्ची के जन्म के बाद उसे सबने प्रताड़ित किया, वो खुद डिप्रेशन में है। ये जेनेटिक्स बच्ची में मां की तरफ से ही आए हैं। ऐसे में हमारा अगला बच्चा भी यदि ऐसा हुआ तब क्या? वहीं, मां ने कहा कि जब से बेटी का जन्म हुआ है, मेरा जीना सबने दूभर कर दिया है। ससुराल के लोग, आस-पड़ोसी सभी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से मुझे ही इसका जिम्मेदार बता रहे हैं। मुझसे यह मानसिक प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं हो रही थी। इसलिए मैं मायके चली आई। मैं खुद डिप्रेशन में हूं, बेटी को कैसे संभालूं।
दंपति को समझाया कि यदि बच्ची को बाद में कोई परेशानी आ जाती तो क्या आप उसे इसी तरह छोड़ देते। साथ ही उन्हें समझाया कि एक तरह से ईश्वर ने उन्हें इस काबिल समझा है कि वह इस बच्ची की परवरिश कर सकते हैं।
कला मोहन, साइकोलॉजिस्ट एंड स्पेशल एजुकेटर