इंदौर – जिस भागीरथपुरा में आज दूषित पानी मौत बनकर घर-घर घुस रहा है, जहां अब तक कई जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं और सैकड़ों लोग अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, उसी इलाके को कुछ महीने पहले शहर का “विकास मॉडल” बताया गया था। यह दावा किसी और ने नहीं, बल्कि खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सार्वजनिक मंच से किया था। अब वही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दावों की पोल खोल रहा है।
वायरल वीडियो अगस्त-2025 का बताया जा रहा है, जिसमें महापौर भागीरथपुरा के पार्षद कमल वाघेला की खुलकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं। मंच से महापौर दावा करते हैं कि बीते तीन वर्षों में भागीरथपुरा क्षेत्र में करीब 10 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए गए हैं। इतना ही नहीं, वे अन्य पार्षदों को भी नसीहत देते हुए कहते हैं कि अगर किसी को विकास का मॉडल देखना हो, तो वह भागीरथपुरा आकर देखे।
“मॉडल” को दिखा रहे थे मिसाल
विडंबना यह है कि जिस “मॉडल” की मिसाल दी जा रही थी, वही इलाका आज दूषित पानी से उपजी महामारी और मौतों का केंद्र बन चुका है। नलों से निकल रहा गंदा पानी लोगों की सेहत ही नहीं, उनकी जिंदगी भी निगल रहा है। सवाल यह है कि अगर करोड़ों के विकास कार्य हुए थे, तो पीने के पानी जैसी बुनियादी व्यवस्था कैसे फेल हो गई? भागीरथपुरा में हालात इस कदर भयावह हैं कि एक-एक घर में बीमार पड़े लोग मिल जाएंगे। डायरिया, उल्टी-दस्त और संक्रमण से जूझते मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। कई परिवार अपने परिजनों को खो चुके हैं, लेकिन प्रशासन अब भी मौतों के असली आंकड़े स्वीकारने से कतरा रहा है। पोस्टमॉर्टम नहीं, रिकॉर्ड अधूरे और जिम्मेदारी तय करने से साफ इनकार यही प्रशासनिक रवैया इस त्रासदी को और गहरा कर रहा है।
वीडियो जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा -
ऐसे में महापौर का यह पुराना वीडियो जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। सवाल उठता है कि क्या विकास का मतलब सिर्फ मंच से प्रमाणपत्र बांटना है? क्या 10 करोड़ रुपये की कथित विकास योजनाओं में पीने का साफ पानी शामिल नहीं था? और अगर था, तो फिर आज वही पानी लोगों की मौत का कारण क्यों बन रहा है?
अब सवाल सिर्फ एक वीडियो का नहीं है, सवाल उस सोच का है जो मौतों के बाद भी अपनी पीठ थपथपाने से बाज नहीं आ रही। भागीरथपुरा में बहता दूषित पानी सिर्फ नलों से नहीं, बल्कि विकास के खोखले दावों की सच्चाई भी उजागर कर रहा है।