दमोह की बंद खदानों को मिल सकता है नया स्वरूप, ईको-पार्क और हरित क्षेत्र विकसित करने की संभावना
दमोह। कभी खनिज उत्खनन के लिए पहचानी जाने वाली खदानों का इस्तेमाल अब पर्यटन, पार्क और रोजगार के नए केंद्र के रूप में किया जा सकता है। प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर बंद या उपयोग में नहीं आ रही खदानों को पर्यटन, ईको-पार्क और हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने के प्रयास शुरू हुए हैं। इसी कड़ी में दमोह जिले के नरसिंहगढ़ क्षेत्र में सीमेंट फैक्ट्री के आसपास मौजूद बंद खदानों को भी योजनाबद्ध तरीके से नया स्वरूप देने की संभावनाएं हैं। खनन गतिविधियों के चलते इन क्षेत्रों का भू-दृश्य बदल चुका है। ऐसे में बंद खदानों का पर्यावरणीय सुधार कर उन्हें पर्यटन, पार्क और सौंदर्यीकरण से जोड़ा जा सकता है। बेहतर योजना और निवेश के जरिए यहां ईको-पार्क, गार्डन, हरित क्षेत्र और सुरक्षित मनोरंजन स्थल जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे क्षेत्र को एक नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की राह खुल सकती है।
सुनार नदी बढ़ा सकती है पर्यटन का आकर्षण
नरसिंहगढ़ के आसपास सुनार नदी का प्राकृतिक सौंदर्य पहले से ही लोगों को आकर्षित करता है। बारिश के मौसम से लेकर ठंड के दिनों तक नदी, चट्टानों से गिरता पानी और आसपास का खुला प्राकृतिक क्षेत्र लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। निकट ही डैम होने के कारण वर्षभर नदी में पानी रहता है। ऐसे में अगर बंद खदानों और नदी क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना तैयार की जाए तो यह इलाका स्थानीय पर्यटन के साथ बाहर से आने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है। यहां आयोजन और समारोह के लिए व्यवस्थित स्थल विकसित करने के साथ प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
'बंद खदानों का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है'
समाजसेवी नित्या प्यासी का कहना है कि बंद खदानों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यहां पार्क, गार्डन और हरित क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं। उनके अनुसार, वर्तमान में कुछ स्थान अपेक्षाकृत एकांत में हैं। ऐसे में योजनाबद्ध विकास से अनैतिक गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित वृक्षारोपण के साथ छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने, सुरक्षित मनोरंजन स्थल और पार्क विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे क्षेत्र को एक नए और आदर्श स्वरूप में विकसित करने की संभावनाएं बनेंगी।
खनन के बाद खाली पड़े क्षेत्र बन सकते हैं अवसर
खनन पूरा होने के बाद खाली पड़े क्षेत्रों को अक्सर अनुपयोगी या उजड़ा हुआ मान लिया जाता है। हालांकि, बेहतर योजना, पर्यावरणीय सुधार और निवेश के जरिए इन क्षेत्रों का इस्तेमाल पर्यटन और रोजगार के लिए किया जा सकता है। बंद खदानों को ईको-टूरिज्म, हरित क्षेत्र और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की पहल नई संभावनाएं खोल सकती है। स्थानीय जरूरतों, पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की जाती है तो भविष्य में यह क्षेत्र पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार के लिहाज से विकसित हो सकता है।






















