Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

इंदौर जैसा हादसा फिर नहीं हो...इसलिए पानी की जांच करने पंचायतें खरीदेंगी टेस्टिंग किट, हर दिन दो सैंपल का लक्ष्य

इंदौर के भागीरथपुरा हादसे से सबक लेते हुए पंचायत विभाग ने नया फैसला किया है। हजारों गांवों में फैले बड़े नेटवर्क से पानी पहुंचने पर कहीं पर भी शुद्धता को लेकर समस्या आ सकती है इसलिए पानी के टेस्टिंग की व्यवस्था की जा रही है।
Follow on Google News
इसलिए पानी की जांच करने पंचायतें खरीदेंगी टेस्टिंग किट, हर दिन दो सैंपल का लक्ष्य
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम ’ भोपाल। प्रदेश में इस वर्ष के आखिरी तक सभी घरों में पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। इंदौर के भागीरथपुरा के हादसे के सबक लेते हुए पंचायत विभाग जांच के लिए फील्ड टेस्टिंग किट (FTK) खरीद को अपने  SOR (शेड्यूल ऑफ रेट) में शामिल करने पर विचार कर रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने पंचायत विभाग को इस संबंध में कहा है।

    एक किट से 1500 सैंपल जांचेंगे

    पीएचई घरों में पहुंचने वाले पानी की शुद्धता जांचने के लिए हर पंचायत को लक्ष्य देगा कि रेंडमली हर दिन पानी के दो टेस्ट किए जाएं। एक FTK की कीमत करीब 1500 रुपए है, जिसमें 1500 सैंपलों की जांच करने की क्षमता होती है। प्रदेश में एक करोड़ 11 लाख से अधिक घरों में पाइप लाइन के जरिए पानी पहुंचना है। इतने बड़े नेटवर्क में पानी की शुद्धता तय करने यह कवायद की जा रही है।

    इस व्यवस्था से फायदा

    गांवों में पानी का नेटवर्क दूर-दूर तक फैला रहेगा। वहां पर लीकेज तलाशने के लिए इतना अमला भी नहीं रहता। अगर कहीं पर लीकेज हो जाए तो पता लगाना मुश्किल होगा। इस किट से अशुद्ध पानी का रिस्क कम हो जाएगा।

    आम आदमी भी पानी की करा सकेंगे जांच

    आम जनता को भी यह सुविधा दी जाएगी कि वे पानी के सैंपल की जांच पीएचई की लैब में बिना किसी शुल्क दिए करा सके। सैंपल लेने के 24 घंटे के अंदर पानी की टेस्टिंग कराना होगा। यह सुविधा विभाग के 147 वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों और 187 लैब में उपलब्ध रहेगी। सरकार ने सभी जिला मुख्यालयों और दो ब्लाकों के बीच में एक पानी की टेस्टिंग लैब बनाई है। हालांकि इनमें जांच करने वाले कैमिस्ट आउटसोर्स से रखे गए हैं।

    अभी यह है स्थिति

    मप्र जल जीवन मिशन ने बीते एक साल में तीन लाख 68 हजार पानी के सैंपल लिए थे। इसमें से सिर्फ 373 सैंपल फेल हुए हैं। हालांकि गांवों में पानी के पाइप लाइन के बगल में सीवेज लाइन भी नहीं है और न ही जल स्रोतों के आस-पास गंदगी है। जिन क्षेत्रों में अंडर ग्राउंड वाटर फ्लोटाइड, कैल्शियम, आयरन की समस्या थी, वहां नदी तालाबों से पानी सप्लाई की व्यवस्था की गई है।

    अब साफ पानी आता है

    शुरुआत में पानी मटमैला आ रहा था। इसकी शिकायत की गई। अब पानी साफ आता है। बारिश के दौरान जरूर खराब पानी आता है।

    प्रदीप तिवारी, बडैया गांव तहसील हनुमना, रीवा

    पंचायत निधि से खरीदेंगे किट

    एफटीके किट खरीदी को शामिल किया गया है। इस पंचायतों की निधि और कुछ योजनाओं से खरीदा जा सकेगा।

    केवीएस चौधारी कोलसानी, एमडी, मप्र जल निगम मर्यादित

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts